Sunday, February 22, 2009

मतिभ्रम की पाठशाला- ... कामेडी कमाल की

पेश है ... मतिभ्रम की पाठशाला- पार्ट २... कामेडी कमाल की. चैनल बदलते रहिये .. या तो कॉमेडी का आतंक है या आतंक के नाम पर नेताओं और चैनल्स की कॉमेडी है ...


जय हो ... इक श्रद्धांजलि गरीबी को....

श्रद्धांजलि गरीबी को ... बधाइयाँ सरकार को ... गरीबी का पता नही गरीब तो हट ही गया ... ये वो बस्ती है जिसकी हस्ती सरकार ने गोमती के सौन्दर्यीकरण के नाम कुर्बान कर दी .. यहाँ बच्चे गाते थे "भारत प्यारा देश हमारा.... " उन्हें मालूम नही कि उनके माँ बाप को हिन्दुस्तानी होते हुए भी बांग्लादेशी साबित कर दिया गया है ...... नही मालूम कि उन्ही के जैसे बच्चों पर बनी फ़िल्म दुनिया में नाम के साथ करोड़ों कमा रही है... ऐ आर रहमान का गीत उनके जैसे ही लोगो की जय जयकार कर रहा है ... "जय हो ...."


Saturday, February 21, 2009

विज्ञापन की पाठशाला ... मतिभ्रम की पाठशाला

मीडिया (सभी माध्यम) में गला काट प्रतियोगिता और विज्ञापन लेने की होड़, कभी-कभी ऐसी हास्यास्पद या शर्मनाक स्थिति बना देती है जो सिर्फ़ हमे आपको माथा पीटने पर मजबूर कर देती है... ऐसा ही एक उदहारण यहाँ भी है, नीचे तस्वीर पर नज़र डालें और सोचें किस इस तरह ख़बर परोसने के मायने क्या हो सकते हैं. क्या अपराधी को अपराध करने से पहले यह गुरु ज्ञान पढ़ना चाहिए था... या यह अपराध करने और उस से बचने का नायाब तरीका बताया जा रहा है ???








Friday, February 20, 2009

दलित हितैषी सरकार ने दलितों-गरीबों को बेघर किया

दलित हितैषी सरकार ने दलितों-गरीबों को बेघर कियानदवा झोपड़-पट्टी को प्रशासन के बुलडोज़रों ने तोड़ गिराया आज बहुजन समाज पार्टी के सतीश चंद्र मिश्रा के इशारे पर स्थानीय प्रशासन ने लखनऊ के डालीगंज छेत्र में नदवा झोपड़-पट्टी को बुलडोज़रों से तोड़ गिराया। २५० से भी अधिक लोग बेघर हो गए। यह घटना प्रदेश की मुख्य मंत्री मायावती के दावे पर सवाल खड़े कर देती है जो मायावती ने अपने जन्मदिन पर किया था - कि उत्तर प्रदेश के हर गरीब को घर मिलेगा. जब वरिष्ट सामाजिक कार्यकर्ता एवं रैमन मैग्सेसे पुरुस्कार से सम्मानित डॉ संदीप पाण्डेय नदवा झोपड़-पट्टी की और जा रहे थे तब पुलिस ने उनको जबरन हिरासत में ले लिए और नदवा जाने से रोका, और हसनगंज पुलिस थाने में रोक कर रखा.

'बेसिक सर्विसेस फॉर उर्बन पुअर' या BSUP के तहत जो मकान गरीबों को मिलने वाले थे, उनको पाने के लिए इस झोपड़-पट्टी में रहने वाले लोग पैसा इकठ्ठा कर रहे थे। इससे पहले कि BSUP वाले घर बन कर तैयार हों, प्रशासन ने इनको बर्बरतापूर्वक बेघर कर दिया। इस नदवा झोपड़-पट्टी में अधिकाँश लोग जो रहते हैं वोह दलित हैं.

जब दोपहर में डॉ संदीप पाण्डेय को हसनगंज पुलिस थाने से बहार जाने की अनुमति मिली, तब तक नदवा झोपड़-पट्टी को बुलडोज़रों ने पूरी तरह से तोड़ दिया था। जो २५० लोग बेघर हुए थे उन्होंने विधान सभा के सामने धरना देने के लिए प्रस्थान कर दिया कि उनको वैकल्पिक रहने की जगह मिले जबतक BSUP वाले मकान बन कर तैयार नहीं हो जाते.

रास्ते में ही इन विस्थापित लोगों में से एक महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। अपर जिला मजिस्ट्रेट ओ.पी.पाठक ने समय से एंबुलेंस बुला कर इस महिला को जिला अस्पताल में भिजवाया जिससे इसको उपयुक्त चिकित्सकिये सहायता मिल सके।लखनऊ के नागरिक, तमाम सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने और जो २५० से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं, उन्होंने प्रदेश सरकार से वैकल्पिक रहने के स्थान के लिए मांग की है, और जल्द-से-जल्द BSUP वाले मकानों को पूरा बनाने के लिए और इन लोगों को आवंटित करने के लिए भी मांग की है.

साभार: http://hindi-cns.blogspot.com/2009/02/blog-post_19.html

Monday, February 9, 2009

कबूतरबाज़ी या स्वादिष्ट चॉकलेट बनाने का नया नुस्खा ????

अभी तक हम यही जानते थे कि विदेशी कंपनियां गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखती हैं... लेकिन ब्रिटेन के डेली मेल के हवाले से मिली ख़बर पर यकीन करें तो मार्स मार्स, ट्विक्स, स्निक्केर्स, गैलेक्सी / M&Ms/ स्कित्त्लेस / M ilky Ways/ Bounty/ Celebrations/ Maltesers/ Minstrels/ Revels/Topics...चॉकलेट बनाने वाली कंपनी के ट्रक से गैरकानूनी प्रवासी बरामद और गिरफ्तार किए गए.
इस ट्रक से चॉकलेट बनाने वाला पाउडर सप्लाई होता था. अंदाजा लगा सकते हैं कि इस पाउडर में छिपे ये अवैध अप्रवासी कितने दिनों तक छिपे होंगे और क्या क्या इस चॉकलेट के पाउडर में मिश्रित किया होगा?
The illegal immigrants headed for Mars: Chocolate-covered stowaways discovered en route to factory
By Danny Brierley Last updated at 1:55 AM on 05th February 2009






Fifteen illegal immigrants were arrested yesterday after they were found hiding in a lorry filled with around 20 tons of cocoa powder. The stowaways had climbed into the tanker as it left Amsterdam on its way to a Mars factory in Slough.

The tanker carrying 20 tonnes of chocolate powder in which 15 stowaways were found hiding when it arrived at the Mars factory in Slough, todayBut police were alerted after the driver of the 37-ton vehicle prepared to unload his cargo.

A factory worker, who asked not to be named, said: 'Soon after the tanker arrived at the factory, the driver got on top of it to open up the hatches on the roof.
'When the driver looked down through the hatches into the tank, he apparently saw lots of men in brown coloured clothes --all saturated with the powder.

'Goodness knows how they managed to breathe because the powder is very fine and would have been in the air. The tanker was about half full of chocolate powder - the usual maximum load, so there would have been room for 15 men to ride on top of it.'

The men were found coated in 20 tonnes of cocoa powder destined for a Mars Bar factory He joked: 'Clearly the group of stowaways were in search of the sweet life - and they took the phrase quite literally when they boarded the truck.' The immigrants are believed to be aged between 20 and 40 and of Middle Eastern origin.

Paramedics were called to the plant but none of the men needed treatment. A police spokesman confirmed all were unhurt but were coughing and spluttering from the powder as they were put into waiting police vans at the Slough Trading Estate.
The Hungarian driver was also arrested, but it was not clear if he had been aware of his illegal cargo.

The stowaways were due to be interviewed by immigration service officials last night.
Staff at the Mars factory --where Mars Bars, Snickers, Twix and M&Ms are produced --declined to comment on the incident.

आइन्दा जब आप इस ब्रांड की चॉकलेट खाएं तो इस ख़बर को ज़रूर याद कर लीजियेगा .... ओरिजनल ख़बर पढने के लिए डेली मेल की वेबसाइट का लिंक यह है

http://www.dailymail.co.uk/news/article-1135766/The-illegal-immigrants-headed-Mars-Chocolate-covered-stowaways-discovered-en-route-factory.html

From अभिव्यक्ति

From अभिव्यक्ति

From अभिव्यक्ति

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Monday, February 2, 2009

सेकुलर चीर का हरण....दुःशाशन कौन?

एनडीटीवी ने एक कार्यक्रम दिखाया सपा के 'सेकुलर सिंह'.... अगर कहूँ कि एक अच्छा प्रयास था तो, चाटुकारिता होगी. इस देश की विडम्बना ही रही है कि यहाँ सेकुलरिज्म हमेशा से ही लंगडा, काना और बहरा रहा है. किसी भी सेकुलर सम्मलेन में चले जाएँ अगर हिंदू बहुतायत में हुए तो सम्मलेन के अंत तक मुसलमानों को बाबर और औरंगजेब कि संतान साबित कर दिया जाएगा और अगर इसका उल्टा हुआ तो समझ लीजिये वो सम्मलेन किसी रेलवे प्लेटफॉर्म पर खड़ी "मौलाना एक्सप्रेस" ही होगी.

तो मै बात कर रहा था सपा के 'सेकुलर सिंह' कार्यक्रम की जनाब एंकर महोदय नामी गिरामी चहरे हैं काव्यात्मक लहजे में कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं, और जिनकी रिपोर्ट दिखाई गई, वे वरिष्ठ सवांददाता हैं और खालिश शायराना अंदाज़ में खबरें पहुंचाते हैं. दोनों की ही खबरें पहुंचाने की अदा के दर्शक कायल हैं. ये दोनो ही व्यक्ति सेकुलरिज्म के नाम पर हो रहे राजनितिक खेल की बात कर रहे थे, कार्यक्रम के पीछे मंशा अच्छी थी पर ये दोनों अपने मानसिकता से मात खा गए. दोनों ही राजनीतिज्ञों की तरह अलग अलग ध्रुवों पर नज़र आए.

न विश्वास आए तो एक बार पुनः वह कार्यक्रम देखियेगा और पाइयेगा की काव्यात्मक लहजे वाला एंकर उसे 'विवादित ढांचा' कह रहा था और शायर संवाददाता उसे 'मस्जिद' बुला रहा था. बात बहुत छोटी सी है , लेकिन सवाल बहुत बड़ा है. जब हम ख़ुद आपस में सहमत न हों तो दुनिया के सामने दिखावा क्यों? आप कहेंगे अगर दोनों ने अलग अलग कह दिया तो क्या बुरा किया.... बिल्कुल वाजिब है आपका सवाल... लेकिन ६ दिसम्बर १९९२ को जो कुछ हुआ उसके पीछे भी तो यही विवाद था कि वह मन्दिर है या मस्जिद है या सेकुलर तौर पर कहें तो "विवादित ढांचा"....? बेहतर होता कि अगर खबरों में वह घटना .... बम कांडों की तरह सिर्फ़ 'अयोध्या काण्ड' या फ़िर '६ दिसम्बर' या ६/१२ के नाम से बुलाई जाए क्योंकि अंको कि कोई जाति या धर्म नही होता है...

क्या पत्रकारों और राजनीतिज्ञों में कोई फर्क नही रह गया या अभी से राज्य सभा नज़र आने लगी ... जनता यहाँ चैनल पर भी हीरे की चमक की आड़ में बेवकूफ बनेगी और वहां संसद में भी धृतराष्ट्रों के बीच उसी की सेकुलर साडी खींची जायेगी....