Wednesday, August 22, 2012

यह यूपी पुलिस है या बैंड-बाजे वाले



-जिन्हें पैसे नहीं मिले, वे दौड़ प्उ़े विधायक जी की गाड़ी के पीछे
- सरकार ने नहीं लिय विधायक के खिलाफ कोई एक्शन, 3 पुलिसवाले सस्पेंड 
लखनऊ। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनके पिता मुलायम सिंह यादव भले कितने दावे कर लें कि प्रदेश में कानून व्यवस्था सुधर जाएगी, लेकिन हालात बिलकुल इसके उलट हैं। कभी अधिकारी तो कभी सत्ताधारी पार्टी सपा के विधायक और मंत्री कोई न कोई ऐसा आचरण कर बैठते हैं जिसके चलते सपा सरकार की छवि धूतिल हो चुकी है। ताजा मामला भदोही से विधायक विजय मिश्रा का है। सोमवार  को नैनी जेल से बाहर आते समय विजय मिश्राा की बेटी ने जेल के बाहर मौजूद पुलिसवालों को पैसे बांटे। पैसे लेने के लिए पुलिसवालों में होड़ मची हुई थी और वे आपस में धक्कामुक्की कर रहे थे। लेकिन यह सारा कृत्य कैमरे पर कैद हो गया और जनता को उनका असली चेहरा दिख गया। 

सोमवार को नैनी जेल के बाहर एक बार फिर यूपी पुलिस का घिनौना चेहरा देखने को मिला। इससे साफ हो गया कि यूपी पुलिस न केवल पैसे के पीछे पागल है बल्कि खैरात में मिलने वाले पैसे के लिए किसी भी हद तक जा सकी है। समाजवादी पार्टी के बाहुबली विधायक विजय मिश्रा सोमवार को इलाहाबाद के नैनी सेंट्रल जेल से रिहा हुए। उनकी रिहाई के समय सैकड़ों की संख्या में उनके समर्थक उनके आगवानी में लग गये। डेढ़ साल बाद जेल से बाहर आने के बाद विजय मिश्रा का परिवार इतना खुश हुआ कि उन्होंने जेल के बाहर इस तरह से पैसे लुटाना शुरु कर दिया जैसे कि शादी ब्याह में बैड-बाजे और नाचने वालों को पैसे दिए जाते हैं। लेकिन यह पैसे लेने वाले न तो नाचने-गाने वाले थे और न ही बैंडबाजे वाले। यह पैसा लेने की होड़ में लगे थे यूपी पुलिस के कांस्टेबल। पिता की जेल से रिहाइ्र से खुश विजय मिश्रा की बेटी सीमा मिश्रा तो इतनी खुश हुईं कि पुलिसकर्मियों को बख्शीश देने से भी नहीं चूकीं। जेल के बाहर ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी ने जैसे ही विजय मिश्रा को सलाम किया उनकी बेटी ने उसके हाथ में 500 का नोट थमा दिया। नोट हाथ में आते ही पुलिसकर्मी वहां से चला गया। इसके बाद तो वहां पैसा लेने के लिए पुलिसवालों में होड़ मच गई। एक न्यूज चैनल पर दिखाये गये वीडियो के मुताबिक बाहुबली विधायक विजय मिश्रा की बेटी पुलिसवालों को पांच पांच सौ रुपये के नोट बख्शीश के तौर पर दे रही हैं। यही नहीं जिन पुलिसवालों को पैसे नहीं मिले वह बारात के पीछे भाग रहे बच्चों की तरह नोट लेने के लिए विजय मिश्रा की उसयूवी के गाड़ी के पीछे-पीछे दौड़ पड़े।

इस तरह पुलिसवालों को नेग की रकम लेने के लिए पागल होते देख, इस बात का अंदाजा तो हो ही जाता है कि वो जेल में भी नेताजी की सुख-सुविधा का कितना ख्याल रखते होंगे। उल्लेख्नीय है कि सपा विधायक विजय मिश्रा पर 60 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। पिछले डेढ़ साल से मायावती सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे नंद गोपाल गुप्ता नंदी पर जुलाई 2010 में हुए हमले के मामल में जेल में बंद थे। इससे पहले विजय मिश्राा उस व्व्त विवादों में आए थे जब वह राष्टï्रपति चुनाव प्रचार के लिए लखनऊ आए वर्तमान राष्टï्रपति के सम्मान में दिए गऐ भेज में नजर आए थे। यह भोज मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दिया था और उस वक्त जेल में निरूद्ध विजय मिश्राा कानून की धज्जियां उड़ाते हुए मुख्तार अंसारी के साथ मुख्यमंत्री आवास पर नजर आए थे। 

कहा जाता है कि घूस लेने वाला जितना बड़ा अपराधी होता है, उससे बड़ा घूस देने वाला। लेकिन अखिलेश यादव की सरकार ने विजय मिश्राा या उनकी बेटी के खिालाफ कोई कार्रवाई करने के बजाय 500 रूपए की नोट लेने वाले 3 पुलिसवालों को सस्पेंड करके अपने कत्र्वयों की इतिश्री कर ली है। 

Reported by Anurag Tiwari for www.voiceofmovement.in 

Saturday, July 14, 2012

यह खबर नहीं, हैवानियत की इंतहा है

- बीच सड़क पर किशोरी की इज्जत तार-तार हुई
- मीडिया में आने के बाद जागी पुलिस
गुवाहाटी।  अगर थोड़ी बहुत भी इंसानियत शेष है तो कानून के रखवालों को शर्म से डूब मरना चाहिए। गुवाहटी की घटना उस पाश्विक सोच का आइना है जिसपर हमने तथाकथित सभ्यता का लबादा डाल रख है। इसे विडम्बना कहें या शर्म से गड़ जाने वाली घटना कि जिस संसदीय क्षेत्र का मतदाता प्रधानमंत्री हो और जिस राज्य से प्रधानमंत्री चुनकर राज्य सभा में प्रतिनिधित्व करता हा,े वहां की राजधानी की सड़कों पर 20-20 दु:शासन एक किशोरी का चीर हरण करते रहे। आधे घंटे तक सड़क पर हैवानियत का नंगा नाच चलता रहा और राहगुजर इसे सड़क पर हो रहा तमाशा समझ आगे बढ़ते रहेे। कहने को असम साक्षरता में  देश के कई राज्यों से कहीं आगे समझा जाता है।

सोमवार की रात कक्षा 11 में पढंने वाली 17 साल की लड़की एक बर्थडे पार्टी से लौट रही थी अभी वह पब से निकली ही थी कि उसे 20 दरिंदो ने सड़क पर ही घेर लिया। इसके बाद जो हैवानियत का नंगा नाच शुरू हुआ वह पुरूष को जन्म देने वाली किसी भी मां के कोख को शर्मशर कर देने वाली थी। दरिंदे उसे नोचते खसोटते रहे, उसके कपड़े तार-तार करते रहे। इतने पर भी मन नहीं माना तो उसके संवेदनश्ील अंगों पर चोट करते रहे। लड़की मिन्नते करती रही जाने देने की गुहार लगाती रही, लेकिन शैतानों का दिल नहीं पसीजा। लड़की ने कई बार दरिंदों से मिन्नत कि मुझे जाने दो...घर पर तुम्हारी भी बहने है, लेकिन लड़की के बार-बार घर जाने की मिन्नतें करने पर भी किसी ने उसकी मदद नहीं की।

हद तो यह थी सारी घटना कैमरे में कैद हो रही थी और दरिंदे अपने चेहरे पर घिनौनी हंसी लिये कैमरे की तरफ देखते रहे। जो जाानकारी मिली है उसके अनुसार पीडि़त लड़की अपने एक दोस्त के साथ दस जुलाई को गुवाहाटी-शिलांग रोड पर स्थित एक बार में गई थी। इस दौरान अपने दोस्तों से उसका किसी बात पर मनमुटाव हो गया। जिसके बाद मौके की ताड़ में बैठे इंसीनी भेडिय़ेां के एक समूह ने इस वाकये का फायदा उठाकर उस लड़की के साथ सरेआम छेडख़ानी और मारपीट की।

टीवी चैनल्स पर घटना के वीडियो और समचार दिखाए जाने के बाद असम पुलिस ने आनन-फानन में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। असम के डीजीपी ने बताया कि इस वारदात में शामिल 11 आरोपियों की पहचान कर ली गई है और इनमें से चार को गिरफ्तार कर लिया गया है। बाकी आरोपी अभी फरार हैं। गिरफ्तार आरोपियों में से एक असम सरकार के सरकारी उपक्रम असम इलेक्ट्रानिक डेवलपमेंट कॉरपोरेशन का कर्मचारी है और इसका नाम अमर ज्योति कलिता है। कलिता ने असमी धारावाहिक में भी काम किया है।  वहीं असम के मुख्यमंत्री तरूण गोगोई ने कहा कि इस तरह की सरेआम छेडख़ानी की घटना किसी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है और समुचित कार्रवाई की जाएगी। पीडि़त लड़की की मां की शिकायत के बाद पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।                                    

असम में किसी महिला के साथ इस तरह सरे-आम बेइज्जत करने की यह कोई पहली घटना नहीं है। कुछ दिन पहले ही असम की एक महिला विधायक को होटल में घुसकर बहशी भीड़ ने बरी तरह से पीटा। लगभग छ: वर्ष पहले भी गुवाहटी में खुली सड़क पर आदिवासी महिलाओं द्वारा विरोध प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने एक महिला को चपेट में ले लिया था। कुछ स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने एक महिला को सरेआम पीटना शुरू कर दिया। उसके कपड़े फाड़ दिए गए। उसे नंगा कर उसके गुप्तांग पर प्रहार करते नजर आए थे। मुंबई और गुडग़ांव में नये साल के जश्र के दौरना भी वहशियों की भीड़ ने इसी तरह की हरकत की थी।  लगभग डेढ़ साल पहले 31 दिसंबर 2011 की रात गुडग़ांव के होटल में नए साल के स्वागत की तैयारी जोरों पर चल रही थी। शराब और शबाब की मस्ती में डूबे हुए लोग बहके जा रहे थे। उसी समय कई लोग सड़क किनारे एक कपल को घेर कर बुरी तरह छेडऩे लगे। आने-जाने वाले मूकदर्शक बने रहे। नए साल की वजह से पुलिस की गश्त तेज थी। लड़की की किस्मत अच्छी थी कि वहां पुलिस आ गई और उसकी जान बची। ऐसी ही घटना नए साल के जश्न के दौरान मुंबई के जूहू बीच के पास हुई थी।

असम में हुई इस शर्मनाक घटना पर अपनी प्रतिक्रया देते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा ममता शर्मा ने कहा कि उन्हें खुद इसकी जानकारी गुरुवार रात मिली है। ममता शर्मा ने असम सरकार से इस बारे में बात करने का भरोसा दिलाया। उन्होंने  ऐसी शर्मनाक घटना को अंजाम देने वालों को उम्र कैद दिए जाने की वकालत की है। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा ने कहा कि यह घटना सोमवार की है लेकिन अब तक सभी आरोपी गिरफ्तार नहीं हुए। इसमें पुलिस की भी लापरवाही है। वह चाहती तो मौके से ही गिरफ्तार कर सकती थी।

Reported for Voice of Movement

आखिर किसे नंगा कर रहे हैं ये भेडि़ए?


- गुवाहटी के बाद अब छत्तीसगढ़ में सामने आई  युवती को निवस्त्र करने की घटना
-  गुजरात में रेप के बाद एमएमएस बनाया तो प. बंगाल में टीचर ने ही किया छात्रा को नंगा
-  बंगलुरू में पति बना हैवान, पत्नी को अपना मूत्र पिलाया
लखनऊ। पिछले 48 घंटों में जो भी खबरें आई हैं, उनसे तो यही जाहिर होता है कि स्त्री मात्र एक खिलौना है, उसे जब जैसे मन चाहे कोई भी नंगा कर सकता है। खेल सकता है और उसकी अस्मिता से खिलवाड़ कर सकता है। गुवाहटी के बाद अब परम्पराओं के धनी राज्य छत्तीसगढ़, गुजरात और पढ़े लिखे लोगों के शहर बंगलुरू की बारी थी। छत्तीसगढ़ में लड़की को नंगा करके उससे परेड कराई गई एमएमएस बनाया गया, गुजरात में छात्रा से रेप कर उसका एमएमएस बनाया गया, बंगलुरू में पत्नी की वफादारी पर शक हुआ तो उसे अपना मूत्र पिला दिया और बंगाल में एक शिक्षिका ने आठवीं की छात्रा के कपड़े पूरी क्लास के सामने उतरवा दिये।  इतनी वीभत्स घटनाएं सामने आने के बाद भी पुलिस का नाकारा रवैया जले पर नमक छिड़कने जैसा है। कहीं पुलिस मामले को दबाने में लगी है तो कहीं उसे शिकायत का इंतजार है। दरअसल गुवाहटी में हुई हैवानियत के बाद वहां के डीजीपी का बयान काफी है, इस देश के पुलिस सिस्टम की नपुंसक मानसिकता को समझने के लिये। असम के डीजीपी अपने मातहतों की कमजोरी छिपाने के लिये कहते हैं कि पुलिस एटीएएम नहीं है जो बटन दबाते हाजिर हो जाए। सही कहा डीजीपी साहब ने, पुलिस तो बैंक का फिक्स्ड डिपॉजिट है, जिसकी मियाद पूरी होने पर आप एप्लीकेशन देंगे तभी आपके खाते में रकम पहुंचेगी।

छत्तीसगढ़ की पर्यटन नगरी रतनपुर में हथियारबंद दरिंदों ने एक प्रेमी युगल को पकड़कर, प्रेमिका के कपड़े उतरवा दिए और उससे नंगा होकर परेड करने पर मजबूर कर दिया। इतना ही नहीं इस कृत्य का मोबाइल से एमएमएस बनाकर उसे लोगों में बांट भी दिया। घटना लगभग पंद्रह दिन पुरानी है, लेकिन इसका एमएमएस आने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। इस एमएमएस में  इसमें किशोर लड़की और चार लड़के दिखाई दे रहे हैं। एकएक कर ये दरिंदे युवती को कपड़े उतारने के लिए मजबूर कर रहे हैं। युवती के गिड़गिड़ाने और मिन्नतें करने के बाद दरिंदे अपने किए पर उतारू हैं। बताया जा रहा है कि पीडि़त युवती रतनपुर के एक नामी गिरामी परिवार की है। वहीं जिले के एसपी ने जहां सधा हुआ बयान दिया है कि क्लिप से पहचान कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी तो रतनपुर के टीआई ने मामले को टालने वाला बयान दिया है। टीआई का कहना है कि हमें घटना की शिकायत नहीं मिली है। वीडियो क्लिपिंग उपलब्ध होने पर दोषियों के खिलाफ  कार्रवाई की जाएगी।

दूसरी तरफ गजरात के अहमदाबाद शहर से हैवानियत की खबर है। अहमदाबाद शहर के एक कॉलेज की छात्रा के साथ से रेप का मामला सामने आया है। रेप करने वाला और कोई नहीं बल्कि उस छात्रा का पड़ोसी ही है। उसने रेप करने के बाद छात्रा का एमएमएस बनाया और उसे इंटरनेट पर डाल दिया। इतने से मन नहीं भरा तो सीडी भी बनाकर बांट दी। पीडिता के बयान के मुताबिक आरोपी युवक का उसके घर आना जाना था। युवक ने उससे कहा कि वह उससे प्यार करता है और शादी करना चाहता है। एक दिन युवक ने धोखे से ड्रिंक में नशे की दवाई पिलाकर बेहोश किया और रेप किया।

पश्चिम बंगाल के बारासात में तो हद हो गई, यहां एक महिला शिक्षक ने ही आठवीं कक्षा की छात्रा की अस्मिता की धज्जियां उड़ाते हुये उसे पूरी क्लास के सामने नंगा कर दिया।  लड़की के पिता पवित्र मंडल ने टीचर रूपाली के खिलाफ  पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा दी है। पिता ने शिकायत में कहा है कि उनकी बेटी पर क्लास की ही एक लड़की के पैसे चुराने का आरोप लगाया गया और तलाशी के नाम पर टीचर ने पूरी क्लास के सामने उनकी बेटी के कपड़े उतरवा दिए।

पढ़े-लिखे लोगों और आईटी के विद्वानों का शहर समझे जाने वाले बंगलुरू में एक पति ने अपनी पत्नी के ऊपर शक होने के चलते उसे अपना मूत्र पीने पर मजबूर कर दिया। विडम्बना यह कि यह कृत्य करने वाला व्यक्ति दांतों का डॉक्टर है। पीडि़ता ने पुलिस को दिए गए बयान में बताया है कि उसका पति कई दिनों से उसे काफी यातनाएं दे रहा है। सबे सामने उसे मुझे बेइज्जत करता थ। जब उसको माहवारी के दौरान पेट में दर्द था तो उसके पति ने उसके पेट पर लात मार दी और जबरदस्ती उसके साथ शरिरिक संबंध बनाए। इतने पर भी जब उसका मन नहीं माना तो उसे अपना मूत्र पिला दिया।

Reported for Voice of Movement

Wednesday, June 13, 2012

सरकारी आंकड़ों में उलझकर रह गई है संवेदना


-  इंसेफेलाइटिस क शिकार समाज का सबसे गरीब तबका जिसकी हुक्मरानों की नजर में कोई अहमियत नहीं
- पोलियो, टीबी और मलेरिया की तरह इंसेफलाइटिस के लिये कोई राष्ट्रीय  कार्यक्रम नहीं बन पाया।
-34 वर्षों में इंसेफेलाइटिस के इलाज के लिये कोई ठोस रणनीति नहीं बनी।
- गोरखपुर और वाराणसी जैसे शहरों के अलावा पूर्वांचल में इंसेफेलाइटिस के इलाज की कोई व्यवस्था नहीं।
- उत्तर प्रदेश सरकार इंसेफेलाइटिस की रोकथाम करने के लिये हमेशा केन्द्र सरकार पर निर्भर।
- इंसेफेलाइटिस का कारगर इलाज ढूंढने में केन्द्र सरकार की योजनायें और राष्ट्रीय विषाणु अनुसंधान केन्द्र जैसी संस्थायें भी बुरी तरह से नाकाम



गोरखपुर/लखनऊ । यहां बीमारी से मर रहे मासूमों का इलाज नहीं होता बल्कि सरकारी आंकड़ों का सालाना जश्र मनता है। यहां मरने वाला हर बच्चा केवल एक आंकड़ा है, जो बढ़ गया तो राजनीति और घट गया तो अपनी पीठ थपथपाने का मौका। जी हां बात कर रहे है पूर्वाचल की जहां जैपनीज इंसेफेलाइटिस और एईएस से हर साल हजारों बच्चों की मौत हो जाती है। सूबे का सरकारी स्वास्थ्य महकमा केवल सलाना अंाकड़ों को सजोने में ही व्यस्त रहता है। इस बीमारी का सबसे अफसोसनाक पहलु यह है कि इसका कोई कारगर इलाज नहीं है। किसी बच्चे का इंसेफेलाइटिस का शिाकर होना और मौत से बच जाने का मतलब बाकी जिंदगी का मतलब केवल सांस भर लेना और जिंदा लाश बनकर रह जाना होता है।

पिछले 34 वर्षों में यह बीमारी लगभग 20 हजार से ज्यादा बच्चों की जान ले चुकी है। इस क्षेत्र में काम करने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओ की मानें तो यह आंकड़ा पिछले 34 वर्षों में 50 हजार का आंकड़ा पर कर चुका है। इस मौत से होन वाले आंकड़ों को पहली बार 1978 रिकार्ड किया गया था। उस वर्ष 1000 से ज्यादा बच्चें की मौत हुई थी। इसके बाद जब 2005 में बच्चों की मौतों की संख्या 1000 के पार पहुंची तो गोरखुपर से लेकर दिल्ली तक कोहराम मच गया। अकेले गोरखपुर स्थित बीआरडी मेडिकल कॉलेज के आंकड़ो की मानें तो इस साल की शुरूआत से अबतक 125 से ज्यादा बच्चे मौत के मुंह में जा चुके हैं। पिछले साल इंसेफेलाइटिस से मरने वाले बच्चों की संख्या 600 पार कर गई थी। यह तो वे आंकड़े हैं जो सरकार अपने यहां दर्ज करती है। बहुत से गरीब परिवार तो अपने बच्चों को अस्पताल तक नहीं ले जा पाते और उनके बच्चों की मौत सरकारी आंकड़ो में कोई जगह नहीं पाती। उल्लेखनीय है कि क इस बीमारी से पीडि़त होने वाले बच्चों में से लगभग 2 प्रतिशत ही शुरुआती स्थिति में मेडिकल कालेज तक पहुंच पाते हैं और बाकी गांव के डाक्टरों के भरोसे पर रहते है। मानसून शुरू होने को है और इंसेफेलाइटिस का दंश झेल चुके पूर्वांचल के गांव परिवार एक बार फिर सहम उठे हैं कि इस बार यह जापानी बुखार कितनों की बलि लेगा। यह कहना बिलकुल भी गलत नहीं होगा कि इंसेफेलाइटिस पूर्वांचल का शोक है। इंसेफेलाइटिस बुखार एक ऐसी डायन जिसे जेई, जापानी इंसेफेलाइटिस , मस्तिष्क ज्वर भोजपुरी में बड़की या नवकी बीमारी सहित न जाने कितने नामों से जाना जाता है। हालात यह हैं कि पूर्वांचल के लगभग सभी जिले इस बीमारी की जद में हैैं, लेकिन मरीजों को इलाज के लिये या तो गोरखपुर मेडिकल कॉलेज या वाराणसी बीएचयू में इलाज कराने जाना पड़ता है।

समस्या तब और गंभीर हो गई जब सरकार ने इंसेफेलाइटिस के नाम पर जैपनीज इंसेफेलाइटिस के टीककरण पर जोर दिया लेकिन एईएस की उपेक्षा कर दी। हालात यह हैं कि मौजूदा स्थिति में जेई पर तो लगभग पूरा नियंत्रण पाया जा चुका है लेकिन इनसेफालोपैथी सिंड्रोम (एईएस) के प्रकोप बढ़ता गया। इलाज के नाम पर सरकारी व्यवस्था का हाल यह है कि गोरखफर के बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में एक-एक बिस्तर पर तीन-तीन बच्चे इलाज के लिये पड़ रहते हैं। जिस जैपनीज इंसेफेलाइटिस को टीकाकरण के जरिये सरकार रोकने का दावा करती है, कायदे से उसके टीके कोल्ड चेन के जरिये सुरक्षित तरीके से संगहीत किये जाने चाहिये। लेकिन अगर गोरखुपर जिले का हाल देखें तो वहां किसी भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर न तो कायदे से बिजली की व्यवस्था है और न ही जनरेटर हैं। ऐसे में अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है संग्रहीत टीके बीमारी का प्रकोप शुरू होने के पहले ही बर्बाद हो चुके होते हैं।

हर साल सरकार की तरफ से वायदों का झुनझुना थमा दिया जाता है। इस बार के विधान सभा चुनावों में भी पूर्वांचल के वोटरों ने इंसेफेलाइटिस  को बड़ा मुद्दा बनाया था। हर बार की तरह यह वायदे और दावे राजनतिक पाटिंयों के घोषण पत्र तक ही सीमित रह गये। हालात यह है कि कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी को अपनी पार्टी के गिरते प्रदर्शन की चिंता के चलते विधान सभा चुनावों के दौरान पूर्वांचल का 5 बार दौरा करना पड़ा। लेकिन चुनावों के बाद न तो केंद्र की कांग्रेस सरकार ने इस इलाके की सुधि ली है और न ही राज्य सरकार ने। सूबे की राज्य सरकार पूर्वांचल के इस शोक का अंत करने के लिये किसी ठोस कदम की घोषण करने के बजाय पूर्ववर्ती मायावती सरकार की पत्थरों से बनी इमारतों और स्मारकों की गिनती में लगी हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब स्वास्थ्य विभाग घोटालों में डूब चुका हो और सरकार पत्थरों के मायाजाल में उलझी हो तो मासूमों को मौत के मुंह में ले जाने वाली इंसेफेलाइटिस से निजात कौन दिलायेगा?


Reported for Voice of Movement

Thursday, May 31, 2012

राजनीति और भ्रष्टïचार की भेट चढ़ गई रेल यात्रियों की सुरक्षा


- घटिया समाग्री के उपयोग से बढ़ी रेल दुर्घटनायें
- रेलमंत्री को दिल्ली के बजाय कोलकाता रहना ज्यादा पसंद
- रेल सुरक्षा से संबंधित फाइलें रेल मंत्रालय में लटकीं

लखनऊ। पहले साल दो साल में रेल दुर्घटना हो जाती थी तो हंगामा मच जाता था। लेकिन भ्रष्ट और संवेदहीन होती व्यवस्था के चलते अब हर महीने या पखवाड़े बड़ी रेल दुर्घटनायें हो रही हैं और मरने वालों के परिवारों का करूण क्रंदन नकारी व्यवस्था केे नक्कारखाने में तूती की तरह हो गई है। हालात यह हैं कि एनडीए के शासनकाल में रेलवे सुरक्षा के लिये बना फड खत्म हो चुका है और रेलवे के आर्थिक हालत बिगड़ी हुई है। अभी हम्पी और बुधवार को इंदौर-रतलाम में हुई दुर्घटनाओं से आम जनता उबरी नहीं थी कि गुरूवार को जौनपुर के पास दून एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने की मनहूस खबर आई। श्ुरूआती दौर में रेलवे ने ठीकरा एस्सिटेंट लोको पॉयलट पर ठीकरा फोड़ा कि उसने इमर्जेंसी ब्रेक लगाये थे। तो वहीं वहीं पूर्व रेल मंत्री और तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ने बिना जांच हुये ही इसे तोडफ़ोड़ के कारण हुई दुर्घटना बता दिया। एक के बाद एक हो रही रेल दुर्घटनाओं के कारण के पीछे राजनीतिक कारण प्रमुख हैं। गठबंधन में चल रही यूपीए सरकार में रेल मंत्रालय को लेकर घमासान मचा हुआ है। दिनेश त्रिवेदी के जबरदस्ती लिये गये इस्तीफे के बाद रेल मंत्री बने मुकुल रॉय का अधिकतर समय कोलकाता में गुजर रहा है। अगर रेलवे बोर्ड के अधिकारियों की मानें तो रेल मंत्री महीने में कम से कम 25 दिन कोलकाता प्रवास पर रहते हैं। इसके चलते रेलवे सुरक्षा से जुड़ी कई फाइलें रेल मंत्रालय में पड़ी रेल मंत्री के नजरे इनायत होने की बाट जोह रही हैं। पिछले कुछ सालों में ट्रेनों के पटरियों से उतरने और एक-दूसरे से टकरा जाने के हादसों में अचानक बढ़ोतरी हुई है। रेलवे की ही विजलेंस टीम ने जब इन हादसों की जांच की तो बहुत ही खौफनाक सच सामने आया। जांच में पाया गया कि रेल पटरियां, ट्रेन के पहियों को टिकाने वाला हैंगर पिन और ब्रेक ब्लॉक दोयम दर्जे की गुणवत्ता के थे। पूरे मामले में सबसे दुखद पहलू यह रहा कि ब्रेक ब्लॉक और हैंगर पिन टूटने की घटनाओं में बढ़ोतरी के बाद भी रेलवे बोर्ड ने इस दिशा में कोई भी सार्थक कदम नहीं उठाया है। ये ऐसे पुर्जे हैं कि अगर चलती ट्रेन में टूटे तो दुर्घटना को रोना नामुमकिन है। भ्रष्टïचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि देश भर की टे्रनों में बहुतायत में घटिया पुर्जे लग चुके हैं और उन्हें एक साथ बदलना लगभग नामुमकिन है। जुलाई 2011 में कालका हादसे के बाद बनी परमाणु वैज्ञानिक डॉ.अनिल काकोदकर की अध्यक्षता वाली कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक अधिकतर रेलवे ट्रैक खराब हो चुके हैं। लगभग हर ट्रेन के यात्री डिब्बे निहायत ही असुरक्षित हैं। बरसों पहले बने रेलवे पुल जर्जर हो चुके हैं। कुल मिलाकर काकोदर कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में सुरक्षा की जो तस्वीर बनाई थी वह निहायत ही भयावह है। रेलवे में पटरियों की देखभाल करने वाले गैंगमैन, गेटमैन और ट्रेन चलाने वाले ड्राइवरों के करीब 24 हजार पद खाली हैं। इस कमेटी ने साफ कहा था किअगले दो-तीन साल तक कोई भी नई ट्रेन चलाने या ट्रेनों में बोगियां बढ़ाये जाने के बजाय रेलवे को अपना पूरा ध्यान सुरक्षा में लगाना चहिये। पिछले दिनों ही खबर आई थी कि सुरक्षा के नाम पर लगभग 15000 करोड़ रूपया और दशकों का समय नष्टï करने के बाद रेलवे के अधिकरियों ने भी मान लिया था कि रेल दुर्घटनाओं को रोकने के लिये वे जिस आटामेटेड सिस्टम पर काम कर रहे थे, वह भारतीय रेल के लिये कारगर नहीं है। इससे पहले हुई हर बड़ी दुघटना के बाद जांच की घोषण के साथ साथ एक रस्मी घोषणा होती रही है कि रेलवे की सुरक्षा को और प्रभावी बनाया जायेगा। पिछले महीने ही वॉयस ऑफ मूवमेंट ने पूर्वोत्तर रेलवे में उपकरणों की खरीद में हो रही धांधली के बारे में बताया था। ऐसे ही 1998 में लुधियाना के पास खन्ना में हुई रेल दुर्घटना के बाद बनी खन्ना जांच कमेटी ने पाया था कि रेल हादसे का कारण था दोयम दर्जे कीे रेल पटरियों का उपयोग। रेलवे के एक अध्किारी ने बताया कि रेल की पटरियों में कई वजह से खामियां आ रही हैं उनमें से प्रमुख है गुणवत्ता को न कायम रख पाना। जितने भी हादसे हो रहे हैं वह या तो दिन में पीक आवर्स में हो रहे हैं या फिर देर रात। यह दोनों ही समय ऐसे हैं जब वातावरण में बदलते तापमान के कारण पटरियां अपना फैलती या सिकुड़ती हैं। अगर पटरियों की गुणवत्ता कायम रखी गई होती तो पटरियां वातावारण के तापमान से इस हद तक प्रभावित न होतीं और अपना स्वरूप कायम रखतीं। जौनपुर हादसे मे भी शुरूआती दौर में जो कारण निकलकर आ रहें हैं, उनके मुताबिक एसिस्टेंट लोको पायलट ने पटरी को टेढ़ा देखकर इमर्जेंसी ब्रेक लगा दिये जिसके चलते सात बोगियां पटरी से उतर गईं और 7 यात्रियों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।

Reported for Voice of Movement, Dated June 1, 2012

Friday, December 30, 2011

निष्काषित होते ही सुबह का भूला दूसरी बार 'घर' लौटा

लखनऊ। चुनावों कि आहट होते ही राजनीतिक वफादारी बदलने का क्रम शुरू हो चुका है। आयाराम गयाराम का बाज़ार गर्म है, सत्ता कि चाहत और टिकट काटने कि आहट के चलते देखते देखते बदली आस्थाओं का पहले खेल का नतीजा समाजवादी पार्टी के पक्ष में गया । कल तक मुलायम को कुनबा परस्त और सपा को उद्योगपतियों की रखैल कि संज्ञा से नवाजने वाले तथाकथित नेता व अपने कार्यों से चर्चित रहे पूर्व मंत्री नरेश अग्रवाल ने अपने पूरे राजनितिक कुनबे, समर्थकों कि भीड़ के साथ समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। सपा के पोस्टरों से गायब हो चुके लोहिया के चिंतन का समाजवादी पार्टी कार्यालय में नरेश के शामिल होने से अधूरा अध्याय भी पूरा हो गया।

इसी बीच मंत्री दद्दन मिश्र जो कल तक आयुर्वेद चिकित्सा राज्य मंत्री के पद का सुख भोग रहे थे, टिकट कटने की सुगबुगाहट के चलते अचानक नैतिकता का दबा कुचला पाठ याद आया और इससे पहले कि निकाले जाने वाले मंत्रियों कि फेरहिस्त में उनका नाम जुड़े, उन्होंने खुद ही इस्तीफा दे देना बेहतर समझा। इसके ठीक उलट समाजवादी पार्टी कार्यालय में उत्सवी माहाल था। बसपा से निष्काषित नरेश अग्रवाल दूसरी बार अपने 'घर' सपा में पूरे कुनबे के साथ लौट आये। सपा नेतृत्व ने भी पुराने मनमुटाव भुलाकर उनका स्वागत किया।



शुक्रवार को जैसा अपेक्षित था वैसा ही हुआ समाजवादी पार्टी ने नरेश अग्रवाल की उनके पुत्र नितिन सहित पार्टी में वापसी की औपचारिक घोषणा कर दी। नरेश अग्रवाल ने भी इस अवसर पर अपनी त्रुटियों के लिए सपा नेतृत्व से माफ़ी मांगी । इस अवसर पर सपा कार्यलय के प्रांगण में एक जनसभा का आयोजन हुआ। इस जनसभा में ही सपा के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने बसपा से निष्काषित सांसद नरेश अग्रवाल और उनके विधायक पुत्र नितिन अग्रवाल को समाजवादी पार्टी की सदस्यता दिलाई। इनके अलावा विधायक राजेश्वरी देवी, उनके भाई और पूर्व विधायक राजकुमार अग्रवाल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मुकेश अग्रवाल, वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष कामिनी अग्रवाल और गोंडा के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष शमीम अहमद ने भी पार्टी की सदस्यता ली । इससे पहले बसपा ने पिता पुत्र द्वय पर पार्टी विरोधी काम में शामिल होने का आरोप लगाते हुये निष्काषित कर दिया । नितिन पर विधायक निधि का दुरूपयोग करने और जनता के बीच जाकर कार्य न करने का आरोप भी था । माना जा रहा है कि बेटे का टिकट काटने से नरेश अग्रवाल बसपा नेतृत्व से खासे नाराज़ थे ।


उनके बगावती तेवर देखते हुये बसपा ने उनका और उनके पुत्र का निष्कासन करना ही उचित समझा । नरेश कि वापसी पर मुलायम सिंह यादव ने कहा कि अग्रवाल के फिर से पार्टी में आने से सपा को आने वाले विधानसभा चुनाव में मजबूती मिलेगी । हरदोई अग्रवाल के प्रभाव वाला इलाका है।

अग्रवाल वर्ष २००८ में बसपा में शामिल हुये थे और उन्हें मायावती ने उन्हें फर्रुखाबाद से लोकसभा का प्रत्याशी बनाया था । लोकसभा चुनाव हारने के बाद उन्हें बसपा ने राज्य सभा का सांसद बनवा दिया था। उस वक़्त नरेश अग्रवाल ने ५ सितारा होटल में हुये समारोह के अपने भाषण में मायावती को भारत का भावी प्रधानमंत्री और देश की कर्णधार कहकर संबोधित किया था। कुछ वैसे ही सुर आज भी सुनने को मिले लेकिन मुलायम सिंह को उत्तर प्रदेश का मुख्या मंत्री बनाने का दावा किया।

Reported By Anurag Tiwari for Voice of Movement

निष्काषित होते ही सुबह का भूला दूसरी बार 'घर' लौटा

लखनऊ। चुनावों कि आहट होते ही राजनीतिक वफादारी बदलने का क्रम शुरू हो चुका है। आयाराम गयाराम का बाज़ार गर्म है, सत्ता कि चाहत और टिकट काटने कि आहट के चलते देखते देखते बदली आस्थाओं का पहले खेल का नतीजा समाजवादी पार्टी के पक्ष में गया । कल तक मुलायम को कुनबा परस्त और सपा को उद्योगपतियों की रखैल कि संज्ञा से नवाजने वाले तथाकथित नेता व अपने कार्यों से चर्चित रहे पूर्व मंत्री नरेश अग्रवाल ने अपने पूरे राजनितिक कुनबे, समर्थकों कि भीड़ के साथ समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। सपा के पोस्टरों से गायब हो चुके लोहिया के चिंतन का समाजवादी पार्टी कार्यालय में नरेश के शामिल होने से अधूरा अध्याय भी पूरा हो गया।

इसी बीच मंत्री दद्दन मिश्र जो कल तक आयुर्वेद चिकित्सा राज्य मंत्री के पद का सुख भोग रहे थे, टिकट कटने की सुगबुगाहट के चलते अचानक नैतिकता का दबा कुचला पाठ याद आया और इससे पहले कि निकाले जाने वाले मंत्रियों कि फेरहिस्त में उनका नाम जुड़े, उन्होंने खुद ही इस्तीफा दे देना बेहतर समझा। इसके ठीक उलट समाजवादी पार्टी कार्यालय में उत्सवी माहाल था। बसपा से निष्काषित नरेश अग्रवाल दूसरी बार अपने 'घर' सपा में पूरे कुनबे के साथ लौट आये। सपा नेतृत्व ने भी पुराने मनमुटाव भुलाकर उनका स्वागत किया।



शुक्रवार को जैसा अपेक्षित था वैसा ही हुआ समाजवादी पार्टी ने नरेश अग्रवाल की उनके पुत्र नितिन सहित पार्टी में वापसी की औपचारिक घोषणा कर दी। नरेश अग्रवाल ने भी इस अवसर पर अपनी त्रुटियों के लिए सपा नेतृत्व से माफ़ी मांगी । इस अवसर पर सपा कार्यलय के प्रांगण में एक जनसभा का आयोजन हुआ। इस जनसभा में ही सपा के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने बसपा से निष्काषित सांसद नरेश अग्रवाल और उनके विधायक पुत्र नितिन अग्रवाल को समाजवादी पार्टी की सदस्यता दिलाई। इनके अलावा विधायक राजेश्वरी देवी, उनके भाई और पूर्व विधायक राजकुमार अग्रवाल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मुकेश अग्रवाल, वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष कामिनी अग्रवाल और गोंडा के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष शमीम अहमद ने भी पार्टी की सदस्यता ली । इससे पहले बसपा ने पिता पुत्र द्वय पर पार्टी विरोधी काम में शामिल होने का आरोप लगाते हुये निष्काषित कर दिया । नितिन पर विधायक निधि का दुरूपयोग करने और जनता के बीच जाकर कार्य न करने का आरोप भी था । माना जा रहा है कि बेटे का टिकट काटने से नरेश अग्रवाल बसपा नेतृत्व से खासे नाराज़ थे ।

Reported by Anurag Tiwari for Voice of Movement


उनके बगावती तेवर देखते हुये बसपा ने उनका और उनके पुत्र का निष्कासन करना ही उचित समझा । नरेश कि वापसी पर मुलायम सिंह यादव ने कहा कि अग्रवाल के फिर से पार्टी में आने से सपा को आने वाले विधानसभा चुनाव में मजबूती मिलेगी । हरदोई अग्रवाल के प्रभाव वाला इलाका है।

अग्रवाल वर्ष २००८ में बसपा में शामिल हुये थे और उन्हें मायावती ने उन्हें फर्रुखाबाद से लोकसभा का प्रत्याशी बनाया था । लोकसभा चुनाव हारने के बाद उन्हें बसपा ने राज्य सभा का सांसद बनवा दिया था। उस वक़्त नरेश अग्रवाल ने ५ सितारा होटल में हुये समारोह के अपने भाषण में मायावती को भारत का भावी प्रधानमंत्री और देश की कर्णधार कहकर संबोधित किया था। कुछ वैसे ही सुर आज भी सुनने को मिले लेकिन मुलायम सिंह को उत्तर प्रदेश का मुख्या मंत्री बनाने का दावा किया।

Reported By Anurag Tiwari for Voice of Movement

Thursday, December 29, 2011

धर्म एक बार फिर 'डेंजर जोन' में

-पांच विधयाकों और एक मंत्री के खिलाफ लोकायुक्त में शिकायत

भ्रष्टाचार के खिलाफ बने माहौल और लगातार मंत्रियों -विधयाकों के खिलाफ हो रही लोकायुक्त जांच और कार्रवाई के चलते अब लोकायुक्त कार्यालय में माननीयों के खिलाफ शिकायतों कि लाइन लग गयी है। गुरुवार को लोकायुक्त कार्यालय में ५ विधयाकों और एक मंत्री जी के खिलाफ भ्रस्ताचार कि शिकायत पहुंची। बेसिक शिक्षा मंत्री धरम सिंह सैनी के खिलाफ लोकायुक्त कार्यालय में दूसरी बार शिकायत पहुंची है। लोकायुक्त ने मडियाहूँ के विधायक केके सचन के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और जांच के आदेश दे दिए हैं।

गुरुवार को लोकायुक्त कार्यालय में एक बार फिर शिकायतों कि फेरहिस्त पहुंची। इस फेरहिस्त में एक शिकायत बेसिक शिक्षा मंत्री धरम सिंह सैनी के खिलाफ भी शिकायत थी। उन पर आरोप है कि उनकी सरपरस्ती में रामपुर के बेसिक शिक्षा अधिकारी नरेन्द्र पाल सिंह लिप्त हैं। इस मामले में शिकायतकर्ता जनपद रामपुर निवासी अमित कुमार ने आरोप लगाया है कि बेसिक शिक्षा अधिकारी खुलेआम रिश्वत मांगते हैं और प्रतिरोध करने पर कहते हैं कि उन्हें मंत्री धर्म सिंह सैनी को भी हिस्सा पहुँचाना है। अमित कुमार ने इस शिकायत में मंत्री और बीएसए दोनों को ही आरोपी बनाया है। शिकायतकर्ता अमित कुमार कि पत्नी अलका गुप्ता जनपद रामपुर के बिलासपुर ब्लाक के सिकरौरा पूर्व माध्यमिक विद्यालय में सहायक अध्यापिका हैं। अमित कुमार ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि बीएसए उनकी पत्नी के खिलाफ मनमाने तरीके से प्रतिकूल प्रविष्टि कर उनको मानसिक रूप से परेशान कर रहा है। इस बाबत जब उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी तो वह भी उन्हें प्राप्त नहीं हुई। इसके अलावा अमित कुमार ने यह भी आरोप लगाया है कि बीएसए ने वर्ष २०१० और २०११ के जून जुलाई के महीने में अध्यापकों के संयोजन के नाम पर जनपद में तैनात शिक्षकों से लाखों रुपये वसूले हैं। अमित कुमार का कहना है कि जब इस वसूली के बाबत उन्होंने बीएसए से पूछा तो उसने बेसिक शिक्षा मंत्री धर्म सिंह सैनी का नाम लेते हुये कहा कि उनका हिस्सा भी तो पहुँचाना है। लोकायुक्त ने इस मामले को प्रारंभिक जांच के लिए अग्रसारित कर दिया है। ज्ञात रहे कि वर्ष २००९ में भी लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा ने जांच कर अपनी टिपण्णी दी थी कि मंत्री जी का आचरण एक भ्रष्ट बेसिक शिक्षा अधिकारी को बचाने में संदिग्ध है इसलिए माननीय मुख्यमंत्री इसमें मंत्री के खिलाफ़ कार्रवाई करें।

इसके अलावा गुरुवार को ही लोकायुक्त कार्यालय में बसपा के पांच विधायकों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत पहुंची। इनमे से एक के खिलाफ लोकायुक्त ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दोआबा से विधायक सुभाष यादव के खिलाफ विजयकांत ने, नाथूपुर से विधयक उमेश चन्द्र पाण्डेय के खिलाफ पवन कुमार ने, बरसठी से विधायक रविन्द्र के खिलाफ तारा ने, आगरा पश्चिम से विधायक गुटियारी लाल दुबेश के खिलाफ सुभाष चन्द्र और मडियाहूँ से विधायक केके सचान के खिलाफ अर्चना सिंह ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुये शिकायत की है। केके सचन के ऊपर लगे आरोपों के सम्बन्ध में प्रस्तुत किये गए साक्ष्य के आधार पर लोकायुक्त ने उनके खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू करने के निर्देश दे दिए हैं।

Reported by Anurag Tiwari for Voice of Movement

Wednesday, December 28, 2011

चन्द्रदेव पर ग्रहण, सदल जांच के साए में

लखनऊ। माया मंत्रिमंडल के ऊपर मंडरा रहे भ्रष्टाचार के काले बदल छंटने का नाम नहीं ले रहे। लोकायुक्त की जांच की बिजलियाँ लगातार माया के मंत्रिमंडल सहयोगियों पर गिर रहीं हैं। बुधवार को लोकायुक्त ने राज्य के लघु उद्योग मंत्री चन्द्रदेव राम यादव को हटाने की संस्तुति मुख्यमंत्री के पास भेज दी। दूसरी तरफ एक और मंत्री के खिलाफ लोकायुक्त ने मामला दर्ज कर प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। बुधवार को ही विधानसभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर के खिलाफ लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज करायी गयी।

कैबिनेट मंत्री चंद्रदेव राम यादव ने लोकायुक्त को दिए गए बयान में स्वीकार करने के बाद कि उन्होंने मंत्री रहते हुए हेडमास्टर का वेतन लिया है, बिजली गिरनी तय थी। बुधवार को लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा ने मीडिया से बात करते हुये बताया कि उन्होंने चंद्रदेव राम यादव को कैबिनेट से हटाने की संस्तुति मुख्यमंत्री कार्यलय को भेज दी है। इससे पहले मंत्री ने लोकायुक्त के सामने यह स्वीकार किया था कि वह 2006 से बतौर हेडमास्टर का वेतन ले रहे हैं। उनकी दलील थी कि उन्हें इस बात की विधिक जानकारी न होने की वजह से उनसे यह भूल हुई है। मंत्री जी पर यह भी आरोप था कि उन्होंने अपने परिवार के लिए १० शस्त्र लाइसेंस बनवाए हैं। इस तथ्य पर मंत्री जी कि दलील थी कि उनका परिवार काफी बड़ा है, इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से इतने शस्त्र लाइसेंस लेना जरूरी था। इस मामले में आजमगढ़ के इंद्रासन सिंह, जय प्रकाश सिंह व राधेश्याम सिंह ने संयुक्त रूप से लघु उद्योग मंत्री चंद्रदेव के खिलाफ शिकायत की थी।

जस्टिस मेहरोत्रा ने अपनी संस्तुति में मुख्यमंत्री को लिखा है कि मंत्री जी ने भारतीय संविधान की शपथ लेने के बाद भी अपने दायित्वों का सही से निर्वहन नहीं किया है और भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए हैं, ऐसे में इन्हें तत्काल मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया जाना चाहिए । उन्होंने मंत्री रहते बतौर काशी माध्यमिक विद्यालय के हेडमास्टर जितनी भी राशि वेतन के रूप में ली है, उसे बैंक के ब्याज दर से वसूला जाए। अध्यापकों के वेतन खाता शीघ्र खुलवाया जाए। इसके अलावा समाज कल्याण विभाग से काशी माध्यमिक विद्यालय में कार्यरत अध्यापकों की संख्या और अध्ययनरत विद्यार्थियों की जांच करायी जाये। मंत्री जी के प्रभाव से जिन ६ अध्यापकों की नियुक्ति हुयी है उसकी भी जांच करायी जाये, यदि जांच में यह नियुक्तियां गलत तरीके से की गयीं पायी जाएँ तो इन्हें तुरंत निरस्त किया जाये। लोकायुक्त ने उन अधिकारीयों के खिलाफ भी टिपण्णी की है जिनकी मिलीभगत से २००४ के शासनादेश का उल्लंघन करते हुये अध्यापकों के खाते न खुलवा कर मंत्री जी बतौर हेडमास्टर वेतन अपने खाते में जमा करवाते रहे । लोकायुक्त ने तकालीन जिलाधिकारी मनीष चौहान की भी भूमिका को संदिग्ध माना है और उनके खिलाफ भी जांच के निदेश दिया हैं। लोकायुक्त ने वर्ष २००६ से आजमगढ़ बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में तैनात वित्त एवं लेक्जधिकारियों कि भूमिका की भी जांच करने कि संस्तुति दी है, जिन्होंने वेतन के कागजात पर हस्ताक्षर कर उसे अनुमोदित किया था। अपने परिवार के नाम पर कई असलहा लाईसेंस बनवाने के मामले में लोकायुक्त ने लिखा है कि २००७ के बाद से मंत्री जी और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर जितने भी असलहा लाईसेंस निर्गत हुये हैं, उनकी जांच मंडलायुक्त से करवाई जाये। इसके अलवा उन्होंने मंत्री द्वारा वर्ष २००७ के बाद से जितनी भी संपत्ति अर्जित कि है उसकी जांच भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत कराने की संस्तुति करते हुये लिखा है कि जांच की रिपोर्ट ६ सप्ताह में उनके सामने पेश की जाये।

हालाँकि इस मामले में मंत्री चंद्रदेव राम यादव ने अपने सभी दांव आजमाये और लोकायुक्त के अधिकार को चुनौती देते रहे लेकिन लोकायुक्त के सामने दिया गया बयान ही उनके लिए गले का फंदा बन गया। स्वयं सिद्ध होने वाले साक्ष्यों के चलते इस मामले में रिकार्ड समय में लोकायुक्त का फैसला आया है।

इसके अलावा माया मंत्रिमंडल में तकनीकी शिक्षा मंत्री और गोरखपुर के बांसगांव से विधायक सदल प्रसाद के खिलाफ लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार का एक मामला दर्ज किया है । मंत्री जी खिलाफ राम कमल यादव ने लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराते हुये भरष्टाचार के आरोप लगाये थे। सदल प्रसाद के ऊपर ट्रस्ट बनाकर अकूत संपत्ति अर्जित करने और पद का दुरुपयोग करते हुये सरकारी जमीनों पर कब्ज़ा करने का आरोप है। लोकायुक्त ने इस मामले में अपनी जांच शुरू कर दी है और सदल प्रसाद को अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। लोकायुक्त ने बाते कि मंत्री जी को मामला दर्ज करने से पहले दो बार समय दिया गया था लेकिन उन्होंने प्रारंभिक जांच में अपना पक्ष प्रस्तुत नहीं किया है। मामला दर्ज होने के बाद मंत्री जी को अपना पक्ष रखने के लिए १५ दिनों का समय दिया गया है.

उधर मंगलवार शाम को लोकायुक्त कार्यालय में विधान सभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी गयी। शिकायतकर्ता आजमगढ़ निवासी सुनील राय ने विधान सभा अध्यक्ष पर आय से अधिक संपत्ति और पद का दुरुपयोग करते हुये अपने परिवार के ट्रस्ट को फायदा पहुंचाने का आरोप है। विधानसभा अध्यक्ष पर आरोप है कि उन्होंने लोगों को डरा धमका कर उनकी जमीनों का बैनामा अपने परिवार के सदस्यों के नाम करवा लिया है। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगे है कि उन्होंने अपनी विधायक निधि का ज्यादातर पैसा अपने माँ और पिता के नाम से चल रहे ट्रस्ट के विद्यालय में दिया है। लोकायुक्त ने कहा कि इस मामले कि प्रारम्भिक जांच और साक्ष्यों कि पुष्टि के बाद ही मामला दर्ज होगा।

Reported by Anurag Tiwari for Voice of Movement

Tuesday, December 27, 2011

विधायक के खिलाफ भी मामला दर्ज, कुशवाहा ने कहा जांच करें बंद

लखनऊ. बाबू सिंह कुशवाहा ने अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के मामलों में लोकायुक्त से निवेदन किया है कि उनके खिलाफ ल्कोयुकता द्वारा जांच रोक दी जाये. उन्होंने हाई कोर्ट में इसी तरह के मामले में रिट दाखिल होने के कारण यह निवेदन किया है. लोकायुक्त ने इस मामले के कागजात तलब किये हैं और कहा कि पुष्टि होने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा.

उधर गोंडा के विधायक रमेश गौतम के खिलाफ शिकायत करने पर शिकायतकर्ता को अपहृत कर जाने से मारने की के आरोप को लोकायुक्त ने गंभीरता से लिया है. लोकायुक्त ने प्रार्थी के शःपथ्पत्र और शिकायत को गोंडा के पुलिस अधीक्षक को जांच के लिए भेज दिया है. साथ ही लोकायुक्त ने विधायक के खिलाफ अपने यहाँ मामला दर्ज कर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच शुरू कर दी है.

गोंडा निवासी राजेश कुमार सिंह ने विधायक रमेश गौतम के खिलाफ भार्स्ताचार के आरोप लगाये हैं. इन आरोपों में उन्होंने कहा है कि चुनाव के समय शपथ पत्र दिया था कि उनके पास बैंक में लगभग ५०० रुपये ही हैं. जबकि विधयक बनते ही ६ महीनों के अन्दर उन्होंने ६ लाख रुपये कि जमीन और स्कार्पियो गाडी खरीदी थी. इसके अलावा विधायक कि पत्नी पर भी आरोप है कि वह सरकारी प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापिका होते हुए भी मान्यता प्राप्त विद्यालय की कोषाध्यक्ष भी हैं. इसके अलावा सरकारी वेतन कम होने के बाद भी हर महीने तीन तीन गाड़ियों की ५० हज़ार रुपयों की किश्त जमा कर रही हैं.

Reported by Anurag Tiwari for Voice of Movement

नसीमुद्दीन की बढीं मुश्किलें, मिले कई साक्ष्य

लोकायुक्त जांच में फंसे बसपा में नंबर दो की हैसियत वाले नसीमुद्दीन के लिए हर रोज़ मुश्किलें बढती ही जा रही हैं. लोकायुक्त के जांच शुरू करने के बाद से इस मामले में रोज़ नए साक्ष्य सामने आ रहे हैं.

नसीमुद्दीन सिद्दकी के खिलाफ खनन पत्तों और मनरेगा योजना के तहत बंटने वाले ट्रैक्टर, थ्रेशर और होवर की बन्दर बाँट के मामले में शिकायतकर्ता जगदीश नारायण शुक्ला ने अपना परिवाद दाखिल करते हुए कई साक्ष्य प्रस्तुत किये हैं. इस मामले में लोकायुक्त ने यूपी अग्रो के एमडी एनएल गंगवार को तलब किया था, लोकायुक्त ने उनसे लाभार्थियों की सूची मांगी थी. गंगवार ने अपनी असमर्थता जताए हुए कहा की यह अभिलेख जनपद स्टार पर सर्विस अभियंता के पास ही उपलब्ध होते हैं इसलिए वे इसे उपलब्ध नहीं करा पायेंगे. इस मामले में लोकायुक्त ने अब सर्विस अभियंता जहूर और मंडलीय अभियंता अवधेश कुमार को बुधवार को अपने कार्यालय में तलब किया है.

नसीमुद्दीन के ही दूसरे मामले में मंगलवार को बांदा, हमीरपुर, महोबा और चित्रकूट के खनन अधिकारीयों ने लोकायुक्त के सामने अपना बयां दर्ज कराया है. इस मामले में नया मोड़ यह आया है कि नस्सेमुद्दीन के प्रभाव में ५ हेक्टेयर से बड़े जो भी प्लाट उनके रिश्तेदारों को आव्नातित किये गए थे, उन पर भारत सरकार्र के पर्यावरण मंत्रालय के निर्देशों के बाद भी अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लिए गए थे.

उधर नसीमुद्दीन की पत्नी हुस्ना सिद्दकी के मामले में नसीमुद्दीन द्वारा बेनामी संपत्ति लिए जाने का मामला सामने आया है. शिकायतकर्ता जगदीश नारायण शुक्ला ने साक्ष्य के रूप में लोकायुक्त के सामने कुछ कागजात प्रस्तुत किये. इन कागजातों के अनुसार नसीमुद्दीन सिद्दकी ने मूलचंद लोधी उर्फ़ मामू को पहले अपना सहयोगी बनाया फिर उसका अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनवा दिया. आरोप यह है कि नसीमुद्दीन ने मामू के जरिये बाराबंकी के गंगवारा, मितई बढेरा झील क्षेत्र में अकूत संपत्ति खरीदी है. नसीमुद्दीन ने मामू के बेटे कि नियुक्ति आबकारी विभाग में ड्राईवर के पद परा करवाई जिसके जरिये भी उन्होंने लगभग २०० बीघा जमीन खरीदी गयी जो कि दिन्दौर फतेह्फुर में क्युएफ़ एजुकेशनल ट्रस्ट की जमीन से सटा हुआ प्लाट है. इसके अलावा हुस्ना के भाई राजू ने भी ५० बीघे की जमीन अपने नाम पर खरीदी है, वह भी क्युएफ़ एजुकेशनल ट्रस्ट की जमीन के बगल में ही है. जगदीश नारायण शुक्ला ने आरोप लगाया कि लोकायुक्त कार्यालय में नसीमुद्दीन के खिलाफ शिकायत करने के बाद से उन्हें जान से मारने कि धमकियां मिल रहीं हैं .

Reported by Anurag Tiwari for Voice of Movement

पत्नी को फायदा पहुंचा रहे थे वन मंत्री तो खाद्य मंत्री अपनी ट्रकें चलवा रहे थे

माया मंत्रिमंडल के सदस्यों के ऊपर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोप थमने का नाम नहीं ले रहे. जिस तरह से एक के बाद एक मंत्रियों के खिलाफ लोकायुक्त की जांच और संस्तुति आ रही है, यह भ्रष्टाचार के मामलों में यह मंत्रिमंडल कीर्तिमान बनाने की ओर निरंतर अग्रसर है. मंगलवार की लोकायुक्त ने मायावती मंत्रिमंडल के दो और मंत्रियों और एक विधायक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

इस बार लोकायुक्त की जांच के घेरे में माया मंत्री मंडल के दो प्रभावशाली मंत्रीगण आये हैं. इनके नाम हैं वन मंत्री फ़तेह बहादुर सिंह और खाद्य मंत्री राम प्रसाद चौधरी. इसके अलावा बसपा के एक विधायक रमेश गौतम के खिलाफ भी लोकायुक्त ने मामला दर्ज कर लिया है. लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा ने बताया कि वन मंत्री फ़तेह बहादुर सिंह के खिलाफ सत्य नारायण यादव ने शिकायत दर्ज करायी थी. इस मामले में अभी तक मंत्री जी को समय दिए जाने के बाद भी, उन्होंने अपना पक्ष प्रस्तुत नहीं किया. जिसके बाद लोकायुक्त ने मामले को दर्ज कर इसकी जांच शुरू कर दी है. वन मंत्री फ़तेह बहादुर के ऊपर आरोप है की उन्होंने अपने पद का दुरूपयोग करते हुए अपने सगे सम्बन्धियों को फायदा पहुँचाया है. उनके ऊपर सर्कर्री जमीनों पर अवैध कब्ज़ा करने का भी आरोप है. शिकायतकरता ने लोकायुक्त कार्यालय में दिए गए अपने पत्र में कहा है की वन मंत्री ने अपने पद का दुरूपयोग करते हुए अपनी पत्नी जो की गोरखपुर में जिला पंचायत हैं उनको फायदा पहुँचाया है. आरोप में कहा गया है की उत्तर प्रदेश वन निगम ने कुछ कार्यों के लिए टेंडर जारी क्या था जिसमें ८.१० करोड़ रुपये सड़क की इंटरलाकिंग के लिए, १.६६ करोड़ रुपये नाली के निर्माण के लिए और २.४ करोड़ रुपये हैण्ड पम्प लगवाने के लिए अनुमोदित किये गए थे. आरोप यह है की मंत्री जी ने अपनी पत्नी को फायदा पहुंचाने के लिए जिला परिषद् गोरखपुर को कार्यदायी संस्था बनाकर उसे यह कार्य उसे दे दिया. इस मामले की जांच में यह पता चला कि मंत्री जो कि पहले अपने आपको वन निगम में किसी पद पर नहीं बता रहे थे, उपरोक्त सभी कार्य उत्तर प्रदेश वन निगम ने उन्हीं की अध्यक्षता में जिला परिषद, गोरखपुर को आवंटित किये. यह तथ्य वन निगम के अधिकारीयों ने लोकायुक्त के सामने रखे. उधर जिला परिषद के अधिकारीयों ने गोलमोल जवाब देते हुए लोकायुक्त के सामने यह बात रखी कि कार्य में अनियमितता पाए जाने के बाद इस कार्य का टेंडर निरस्त कर दिया गया है. लोकायुक्त ने मामले को दर्ज कर वन मंत्री को १५ दिनों में अपना पक्ष प्रस्तुत करने को कहा है.

उधर दूसरे मामले में मायावती मंत्रिमंडल में खाद्य मंत्री राम प्रसाद चौधरी के खिलाफ भी लोकायुक्त ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. खाद्य मंत्री के खिलाफ रमेश तिवारी ने लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज करायी थी. खाद्य मंत्री राम प्रसाद चौधरी राजनीति में आने से पहले अपनी खुद कि राईस मिल और अपनी ट्रांसपोर्ट कम्पनी चलाते थे. खाद्य मंत्री पर आरोप है कि मंत्री बनने के बाद उन्होंने खाद्य मंत्रालय के नियमों को अपने रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए परिवर्तन किये. उन पर आरोप है कि उन्होंने खाद्य मंत्रालय में ढुलाई के काम के लिए रजिस्टर होने वाले ट्रांसपोर्टरों के लिए नियम ऐसे बनाये जिससे केवल उनके रिश्तेदार ही रजिस्ट्रेशन करवा पायें. इसके लिए शासनादेश खाद्य आयुक्त से जारी करवाया गया. जिसके चलते इनके रिश्तेदारों ने अनुमोदित टेंडर रेट से कहीं जयादा रेट टेंडर में डाले जो कि नियमनुसार रेट से ५० प्रतिशत तक अधिक थे. मंत्री जी ने नए नियमों का फायदा उठाकर अपने ट्रक भी इस कार्य में लगा लिए. इसके बाद ठेकेदारों ने खाद्य मंत्रालय में अनापशनाप बिल प्रस्तुस्त किये जिनका भुगतान भी मंत्री जी के प्रभाव से हो गया. मामला लोकायुक्त कार्यालय में पहुँचने के बाद खाद्य मंत्रालय के अफसरों ने दावा किया कि ज्यादा बिल अनुमोदित होने के मामले में सम्बंधित ट्रांसपोर्टरों से रिकवरी कर ली गयी है. लोकायुक्त ने कहा कि रिकवरी कि दलील कि जांच होनी है. इसके अलावा मंत्री जी के ऊपर यह भी आरोप है कि उन्होंने खाद्य मंत्री रहते अपने राईस मिल में धान की कुटाई हुए बिना ही इस कार्य का भुगतान करवा दिया.

Reported by Anurag Tiwari for Voice of Movement

Wednesday, January 20, 2010

नीलकंठ

नीलकंठ बनकर हम बेबस ज़हर पीते रहे;
हुकमरानो की दी हुई मौत को ज़िन्दगी समझ जीते रहे.

समेट पाते कैसे खुदा की नेमत और दी हुई खुशी को,
अँधेरे में आंसुओं से अपना चाक दमन सीते रहे.

बड़का बड़का सभ्य

एक सभ्य भये ओसामा भैया, एक भई तालिबानी फ़ौज,
एक सभ्य भये ठाकरे काका, पीट गंवई भतीजा करे मौज.

श्री राम पीट रहीन माथा आपन, लो फिर पद गए लेने के देने,
पूछें, भईया मुथालिक हमने कब कड़ी की ऐसी श्री राम सेने.

कौन सभ्यता में पैदा भयें इ बड़का बड़का दानव,
जानवरन से करम करें , कहें अपने का मानव.

ख़ुदकुशी

वो जो हुआ करते थे, अब नहीं हैं.
जिन्हें देख लोग खुश थे, अब नहीं हैं.
जिन्हें देख लोगों को जलन होती थी, अब नहीं हैं.
वो खुद में खुश रहा करते थे, अब नहीं हैं..

उन्होंने कल ख़ुदकुशी कर ली...

गुंडास्वामी , सत्ता-स्वामी

कल रात सुनसान गली में मिले मुझे इलाके के डान,
प्रणाम किया, हाथ जोड़े, विनती की, बख्श दो मेरी जान.

उस्ताद नया हूँ, मिला कोई शिकार आपको बातऊँगा,
आइन्दा भूलकर भी आपके रास्ते में ना आऊंगा.

बोले गुंडास्वामी, बख्श दिया तू नया नवेला है,
जा भाग, याद रख, आज से तू मेरा चेला है.

मिलें जो कहीं गुंडास्वामी, अवश्य झुक प्रणाम करें,
सत्ता में ये कल जाने कौन मंत्री का नाम धरें.

कुछ तो पहले गुंडे थे, अब सत्ता में नेता हो गए,
कुछ सत्ता पाकर इस समुदाय के प्रणेता हो गए.

जय हो चचा ओबामा की

पर उपदेश कुशल बहुतेरे,
चचा ओबामा ज़रा इधर मुंह फेरें

बहादुरी की देंगे न हांको,
कभी अपने अन्दर भी झांको.

पाकिस्तान मांग के तुमसे खाता,
हुकुमउदूली के डंके बजाता.

वो तुम्हे है जान से प्यारा,
तुम्हारी आँखों का तारा.

अफगानिस्तान तक भाग के आये,
तुम्ही जानो क्या उखाड़ पाए.

WMD का तुम अंश ना पाए,
ईराक में यू हीं विध्वंश मचाये.

अब आई है ईरान की बारी,
उसने कब खोली भैंस तुम्हारी.

'अर्थशास्त्री' को 1-2-3 बहुत पढवाया,
परमाणु कचरा ठिकाने लगवाया..

जवाबदेही दुनिया की, प्रदूषण तुम करो,
शोषितों का रक्त-चूषण तुम करो.

कोपेनहेगन में जनाजा निकलवाया,
प्रदूषण दूर कर के नाम पर और प्रदूषण फैलवाया

हमारा बजाज

सुबह पापा का उस पर दफ्तर जाना,
टोल क्स एक क्कर हमें घुमाना.

शाम को उसका टैक्सी बन जाना,
रास्ते में रुक-रुक तन जाना.

सीधे तो कोई बात ना होती,
बिना टेढ़े हुए स्टार्ट ना होती.

सच है, जो कल था वो नहीं है आज,
अब तो यादों में ही मिलेगा हमारा बजाज.

(A tribute to BAJAJ Scooters)

अजब प्रीत गज़ब रीत

प्रीत में मत पडियो मेरे मीत,
प्रीत जाएगी जीत, तू जायेगा बीत.

अब बस गीतों में बसे कहीं प्रीत,
प्रीत हुई सजातीय, बेतुकी रीत गयी जीत.

कहाँ मिलती अब जन्मो की प्रीत,
समझो गनीमत, एक जनम जो जाये बीत.

मोबाइल सेट से पहले बदलें मनमीत,
चैट पर बने रिश्ते, SMS पे जाएँ बीत.

प्रीत हुई अब इंडो-पाक बात-चीत,
वर्तमान धुंधला, भविष्य बना अतीत.

आँगन-बदरा का प्यार

अंसुअन की धार है या बदरा का प्यार
जग तनिक भी खबर ना पाए

गिर कर आँगन से जो चोट पाए,
पानी आँगन को सहलाए.

आँगन बूंदों से चोट खाए,
पानी को गोद में ले सामये

गुमसुम आँगन बदरा निहारे,
तडपे पानी भी, जब सूखा पड़ जाए.

आँगन की बरसात में, पानी भीगा जाए,
आँगन सूना ही रहे, पानी आंसू बहाए..

प्यार है तकरार है, क्या रिश्ता है,
ये कविवर कभी समझ ना पाए.

Wednesday, August 22, 2012



-जिन्हें पैसे नहीं मिले, वे दौड़ प्उ़े विधायक जी की गाड़ी के पीछे
- सरकार ने नहीं लिय विधायक के खिलाफ कोई एक्शन, 3 पुलिसवाले सस्पेंड 
लखनऊ। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनके पिता मुलायम सिंह यादव भले कितने दावे कर लें कि प्रदेश में कानून व्यवस्था सुधर जाएगी, लेकिन हालात बिलकुल इसके उलट हैं। कभी अधिकारी तो कभी सत्ताधारी पार्टी सपा के विधायक और मंत्री कोई न कोई ऐसा आचरण कर बैठते हैं जिसके चलते सपा सरकार की छवि धूतिल हो चुकी है। ताजा मामला भदोही से विधायक विजय मिश्रा का है। सोमवार  को नैनी जेल से बाहर आते समय विजय मिश्राा की बेटी ने जेल के बाहर मौजूद पुलिसवालों को पैसे बांटे। पैसे लेने के लिए पुलिसवालों में होड़ मची हुई थी और वे आपस में धक्कामुक्की कर रहे थे। लेकिन यह सारा कृत्य कैमरे पर कैद हो गया और जनता को उनका असली चेहरा दिख गया। 

सोमवार को नैनी जेल के बाहर एक बार फिर यूपी पुलिस का घिनौना चेहरा देखने को मिला। इससे साफ हो गया कि यूपी पुलिस न केवल पैसे के पीछे पागल है बल्कि खैरात में मिलने वाले पैसे के लिए किसी भी हद तक जा सकी है। समाजवादी पार्टी के बाहुबली विधायक विजय मिश्रा सोमवार को इलाहाबाद के नैनी सेंट्रल जेल से रिहा हुए। उनकी रिहाई के समय सैकड़ों की संख्या में उनके समर्थक उनके आगवानी में लग गये। डेढ़ साल बाद जेल से बाहर आने के बाद विजय मिश्रा का परिवार इतना खुश हुआ कि उन्होंने जेल के बाहर इस तरह से पैसे लुटाना शुरु कर दिया जैसे कि शादी ब्याह में बैड-बाजे और नाचने वालों को पैसे दिए जाते हैं। लेकिन यह पैसे लेने वाले न तो नाचने-गाने वाले थे और न ही बैंडबाजे वाले। यह पैसा लेने की होड़ में लगे थे यूपी पुलिस के कांस्टेबल। पिता की जेल से रिहाइ्र से खुश विजय मिश्रा की बेटी सीमा मिश्रा तो इतनी खुश हुईं कि पुलिसकर्मियों को बख्शीश देने से भी नहीं चूकीं। जेल के बाहर ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी ने जैसे ही विजय मिश्रा को सलाम किया उनकी बेटी ने उसके हाथ में 500 का नोट थमा दिया। नोट हाथ में आते ही पुलिसकर्मी वहां से चला गया। इसके बाद तो वहां पैसा लेने के लिए पुलिसवालों में होड़ मच गई। एक न्यूज चैनल पर दिखाये गये वीडियो के मुताबिक बाहुबली विधायक विजय मिश्रा की बेटी पुलिसवालों को पांच पांच सौ रुपये के नोट बख्शीश के तौर पर दे रही हैं। यही नहीं जिन पुलिसवालों को पैसे नहीं मिले वह बारात के पीछे भाग रहे बच्चों की तरह नोट लेने के लिए विजय मिश्रा की उसयूवी के गाड़ी के पीछे-पीछे दौड़ पड़े।

इस तरह पुलिसवालों को नेग की रकम लेने के लिए पागल होते देख, इस बात का अंदाजा तो हो ही जाता है कि वो जेल में भी नेताजी की सुख-सुविधा का कितना ख्याल रखते होंगे। उल्लेख्नीय है कि सपा विधायक विजय मिश्रा पर 60 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। पिछले डेढ़ साल से मायावती सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे नंद गोपाल गुप्ता नंदी पर जुलाई 2010 में हुए हमले के मामल में जेल में बंद थे। इससे पहले विजय मिश्राा उस व्व्त विवादों में आए थे जब वह राष्टï्रपति चुनाव प्रचार के लिए लखनऊ आए वर्तमान राष्टï्रपति के सम्मान में दिए गऐ भेज में नजर आए थे। यह भोज मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दिया था और उस वक्त जेल में निरूद्ध विजय मिश्राा कानून की धज्जियां उड़ाते हुए मुख्तार अंसारी के साथ मुख्यमंत्री आवास पर नजर आए थे। 

कहा जाता है कि घूस लेने वाला जितना बड़ा अपराधी होता है, उससे बड़ा घूस देने वाला। लेकिन अखिलेश यादव की सरकार ने विजय मिश्राा या उनकी बेटी के खिालाफ कोई कार्रवाई करने के बजाय 500 रूपए की नोट लेने वाले 3 पुलिसवालों को सस्पेंड करके अपने कत्र्वयों की इतिश्री कर ली है। 

Reported by Anurag Tiwari for www.voiceofmovement.in 

Saturday, July 14, 2012

- बीच सड़क पर किशोरी की इज्जत तार-तार हुई
- मीडिया में आने के बाद जागी पुलिस
गुवाहाटी।  अगर थोड़ी बहुत भी इंसानियत शेष है तो कानून के रखवालों को शर्म से डूब मरना चाहिए। गुवाहटी की घटना उस पाश्विक सोच का आइना है जिसपर हमने तथाकथित सभ्यता का लबादा डाल रख है। इसे विडम्बना कहें या शर्म से गड़ जाने वाली घटना कि जिस संसदीय क्षेत्र का मतदाता प्रधानमंत्री हो और जिस राज्य से प्रधानमंत्री चुनकर राज्य सभा में प्रतिनिधित्व करता हा,े वहां की राजधानी की सड़कों पर 20-20 दु:शासन एक किशोरी का चीर हरण करते रहे। आधे घंटे तक सड़क पर हैवानियत का नंगा नाच चलता रहा और राहगुजर इसे सड़क पर हो रहा तमाशा समझ आगे बढ़ते रहेे। कहने को असम साक्षरता में  देश के कई राज्यों से कहीं आगे समझा जाता है।

सोमवार की रात कक्षा 11 में पढंने वाली 17 साल की लड़की एक बर्थडे पार्टी से लौट रही थी अभी वह पब से निकली ही थी कि उसे 20 दरिंदो ने सड़क पर ही घेर लिया। इसके बाद जो हैवानियत का नंगा नाच शुरू हुआ वह पुरूष को जन्म देने वाली किसी भी मां के कोख को शर्मशर कर देने वाली थी। दरिंदे उसे नोचते खसोटते रहे, उसके कपड़े तार-तार करते रहे। इतने पर भी मन नहीं माना तो उसके संवेदनश्ील अंगों पर चोट करते रहे। लड़की मिन्नते करती रही जाने देने की गुहार लगाती रही, लेकिन शैतानों का दिल नहीं पसीजा। लड़की ने कई बार दरिंदों से मिन्नत कि मुझे जाने दो...घर पर तुम्हारी भी बहने है, लेकिन लड़की के बार-बार घर जाने की मिन्नतें करने पर भी किसी ने उसकी मदद नहीं की।

हद तो यह थी सारी घटना कैमरे में कैद हो रही थी और दरिंदे अपने चेहरे पर घिनौनी हंसी लिये कैमरे की तरफ देखते रहे। जो जाानकारी मिली है उसके अनुसार पीडि़त लड़की अपने एक दोस्त के साथ दस जुलाई को गुवाहाटी-शिलांग रोड पर स्थित एक बार में गई थी। इस दौरान अपने दोस्तों से उसका किसी बात पर मनमुटाव हो गया। जिसके बाद मौके की ताड़ में बैठे इंसीनी भेडिय़ेां के एक समूह ने इस वाकये का फायदा उठाकर उस लड़की के साथ सरेआम छेडख़ानी और मारपीट की।

टीवी चैनल्स पर घटना के वीडियो और समचार दिखाए जाने के बाद असम पुलिस ने आनन-फानन में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। असम के डीजीपी ने बताया कि इस वारदात में शामिल 11 आरोपियों की पहचान कर ली गई है और इनमें से चार को गिरफ्तार कर लिया गया है। बाकी आरोपी अभी फरार हैं। गिरफ्तार आरोपियों में से एक असम सरकार के सरकारी उपक्रम असम इलेक्ट्रानिक डेवलपमेंट कॉरपोरेशन का कर्मचारी है और इसका नाम अमर ज्योति कलिता है। कलिता ने असमी धारावाहिक में भी काम किया है।  वहीं असम के मुख्यमंत्री तरूण गोगोई ने कहा कि इस तरह की सरेआम छेडख़ानी की घटना किसी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है और समुचित कार्रवाई की जाएगी। पीडि़त लड़की की मां की शिकायत के बाद पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।                                    

असम में किसी महिला के साथ इस तरह सरे-आम बेइज्जत करने की यह कोई पहली घटना नहीं है। कुछ दिन पहले ही असम की एक महिला विधायक को होटल में घुसकर बहशी भीड़ ने बरी तरह से पीटा। लगभग छ: वर्ष पहले भी गुवाहटी में खुली सड़क पर आदिवासी महिलाओं द्वारा विरोध प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने एक महिला को चपेट में ले लिया था। कुछ स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने एक महिला को सरेआम पीटना शुरू कर दिया। उसके कपड़े फाड़ दिए गए। उसे नंगा कर उसके गुप्तांग पर प्रहार करते नजर आए थे। मुंबई और गुडग़ांव में नये साल के जश्र के दौरना भी वहशियों की भीड़ ने इसी तरह की हरकत की थी।  लगभग डेढ़ साल पहले 31 दिसंबर 2011 की रात गुडग़ांव के होटल में नए साल के स्वागत की तैयारी जोरों पर चल रही थी। शराब और शबाब की मस्ती में डूबे हुए लोग बहके जा रहे थे। उसी समय कई लोग सड़क किनारे एक कपल को घेर कर बुरी तरह छेडऩे लगे। आने-जाने वाले मूकदर्शक बने रहे। नए साल की वजह से पुलिस की गश्त तेज थी। लड़की की किस्मत अच्छी थी कि वहां पुलिस आ गई और उसकी जान बची। ऐसी ही घटना नए साल के जश्न के दौरान मुंबई के जूहू बीच के पास हुई थी।

असम में हुई इस शर्मनाक घटना पर अपनी प्रतिक्रया देते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा ममता शर्मा ने कहा कि उन्हें खुद इसकी जानकारी गुरुवार रात मिली है। ममता शर्मा ने असम सरकार से इस बारे में बात करने का भरोसा दिलाया। उन्होंने  ऐसी शर्मनाक घटना को अंजाम देने वालों को उम्र कैद दिए जाने की वकालत की है। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा ने कहा कि यह घटना सोमवार की है लेकिन अब तक सभी आरोपी गिरफ्तार नहीं हुए। इसमें पुलिस की भी लापरवाही है। वह चाहती तो मौके से ही गिरफ्तार कर सकती थी।

Reported for Voice of Movement


- गुवाहटी के बाद अब छत्तीसगढ़ में सामने आई  युवती को निवस्त्र करने की घटना
-  गुजरात में रेप के बाद एमएमएस बनाया तो प. बंगाल में टीचर ने ही किया छात्रा को नंगा
-  बंगलुरू में पति बना हैवान, पत्नी को अपना मूत्र पिलाया
लखनऊ। पिछले 48 घंटों में जो भी खबरें आई हैं, उनसे तो यही जाहिर होता है कि स्त्री मात्र एक खिलौना है, उसे जब जैसे मन चाहे कोई भी नंगा कर सकता है। खेल सकता है और उसकी अस्मिता से खिलवाड़ कर सकता है। गुवाहटी के बाद अब परम्पराओं के धनी राज्य छत्तीसगढ़, गुजरात और पढ़े लिखे लोगों के शहर बंगलुरू की बारी थी। छत्तीसगढ़ में लड़की को नंगा करके उससे परेड कराई गई एमएमएस बनाया गया, गुजरात में छात्रा से रेप कर उसका एमएमएस बनाया गया, बंगलुरू में पत्नी की वफादारी पर शक हुआ तो उसे अपना मूत्र पिला दिया और बंगाल में एक शिक्षिका ने आठवीं की छात्रा के कपड़े पूरी क्लास के सामने उतरवा दिये।  इतनी वीभत्स घटनाएं सामने आने के बाद भी पुलिस का नाकारा रवैया जले पर नमक छिड़कने जैसा है। कहीं पुलिस मामले को दबाने में लगी है तो कहीं उसे शिकायत का इंतजार है। दरअसल गुवाहटी में हुई हैवानियत के बाद वहां के डीजीपी का बयान काफी है, इस देश के पुलिस सिस्टम की नपुंसक मानसिकता को समझने के लिये। असम के डीजीपी अपने मातहतों की कमजोरी छिपाने के लिये कहते हैं कि पुलिस एटीएएम नहीं है जो बटन दबाते हाजिर हो जाए। सही कहा डीजीपी साहब ने, पुलिस तो बैंक का फिक्स्ड डिपॉजिट है, जिसकी मियाद पूरी होने पर आप एप्लीकेशन देंगे तभी आपके खाते में रकम पहुंचेगी।

छत्तीसगढ़ की पर्यटन नगरी रतनपुर में हथियारबंद दरिंदों ने एक प्रेमी युगल को पकड़कर, प्रेमिका के कपड़े उतरवा दिए और उससे नंगा होकर परेड करने पर मजबूर कर दिया। इतना ही नहीं इस कृत्य का मोबाइल से एमएमएस बनाकर उसे लोगों में बांट भी दिया। घटना लगभग पंद्रह दिन पुरानी है, लेकिन इसका एमएमएस आने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। इस एमएमएस में  इसमें किशोर लड़की और चार लड़के दिखाई दे रहे हैं। एकएक कर ये दरिंदे युवती को कपड़े उतारने के लिए मजबूर कर रहे हैं। युवती के गिड़गिड़ाने और मिन्नतें करने के बाद दरिंदे अपने किए पर उतारू हैं। बताया जा रहा है कि पीडि़त युवती रतनपुर के एक नामी गिरामी परिवार की है। वहीं जिले के एसपी ने जहां सधा हुआ बयान दिया है कि क्लिप से पहचान कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी तो रतनपुर के टीआई ने मामले को टालने वाला बयान दिया है। टीआई का कहना है कि हमें घटना की शिकायत नहीं मिली है। वीडियो क्लिपिंग उपलब्ध होने पर दोषियों के खिलाफ  कार्रवाई की जाएगी।

दूसरी तरफ गजरात के अहमदाबाद शहर से हैवानियत की खबर है। अहमदाबाद शहर के एक कॉलेज की छात्रा के साथ से रेप का मामला सामने आया है। रेप करने वाला और कोई नहीं बल्कि उस छात्रा का पड़ोसी ही है। उसने रेप करने के बाद छात्रा का एमएमएस बनाया और उसे इंटरनेट पर डाल दिया। इतने से मन नहीं भरा तो सीडी भी बनाकर बांट दी। पीडिता के बयान के मुताबिक आरोपी युवक का उसके घर आना जाना था। युवक ने उससे कहा कि वह उससे प्यार करता है और शादी करना चाहता है। एक दिन युवक ने धोखे से ड्रिंक में नशे की दवाई पिलाकर बेहोश किया और रेप किया।

पश्चिम बंगाल के बारासात में तो हद हो गई, यहां एक महिला शिक्षक ने ही आठवीं कक्षा की छात्रा की अस्मिता की धज्जियां उड़ाते हुये उसे पूरी क्लास के सामने नंगा कर दिया।  लड़की के पिता पवित्र मंडल ने टीचर रूपाली के खिलाफ  पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा दी है। पिता ने शिकायत में कहा है कि उनकी बेटी पर क्लास की ही एक लड़की के पैसे चुराने का आरोप लगाया गया और तलाशी के नाम पर टीचर ने पूरी क्लास के सामने उनकी बेटी के कपड़े उतरवा दिए।

पढ़े-लिखे लोगों और आईटी के विद्वानों का शहर समझे जाने वाले बंगलुरू में एक पति ने अपनी पत्नी के ऊपर शक होने के चलते उसे अपना मूत्र पीने पर मजबूर कर दिया। विडम्बना यह कि यह कृत्य करने वाला व्यक्ति दांतों का डॉक्टर है। पीडि़ता ने पुलिस को दिए गए बयान में बताया है कि उसका पति कई दिनों से उसे काफी यातनाएं दे रहा है। सबे सामने उसे मुझे बेइज्जत करता थ। जब उसको माहवारी के दौरान पेट में दर्द था तो उसके पति ने उसके पेट पर लात मार दी और जबरदस्ती उसके साथ शरिरिक संबंध बनाए। इतने पर भी जब उसका मन नहीं माना तो उसे अपना मूत्र पिला दिया।

Reported for Voice of Movement

Wednesday, June 13, 2012


-  इंसेफेलाइटिस क शिकार समाज का सबसे गरीब तबका जिसकी हुक्मरानों की नजर में कोई अहमियत नहीं
- पोलियो, टीबी और मलेरिया की तरह इंसेफलाइटिस के लिये कोई राष्ट्रीय  कार्यक्रम नहीं बन पाया।
-34 वर्षों में इंसेफेलाइटिस के इलाज के लिये कोई ठोस रणनीति नहीं बनी।
- गोरखपुर और वाराणसी जैसे शहरों के अलावा पूर्वांचल में इंसेफेलाइटिस के इलाज की कोई व्यवस्था नहीं।
- उत्तर प्रदेश सरकार इंसेफेलाइटिस की रोकथाम करने के लिये हमेशा केन्द्र सरकार पर निर्भर।
- इंसेफेलाइटिस का कारगर इलाज ढूंढने में केन्द्र सरकार की योजनायें और राष्ट्रीय विषाणु अनुसंधान केन्द्र जैसी संस्थायें भी बुरी तरह से नाकाम



गोरखपुर/लखनऊ । यहां बीमारी से मर रहे मासूमों का इलाज नहीं होता बल्कि सरकारी आंकड़ों का सालाना जश्र मनता है। यहां मरने वाला हर बच्चा केवल एक आंकड़ा है, जो बढ़ गया तो राजनीति और घट गया तो अपनी पीठ थपथपाने का मौका। जी हां बात कर रहे है पूर्वाचल की जहां जैपनीज इंसेफेलाइटिस और एईएस से हर साल हजारों बच्चों की मौत हो जाती है। सूबे का सरकारी स्वास्थ्य महकमा केवल सलाना अंाकड़ों को सजोने में ही व्यस्त रहता है। इस बीमारी का सबसे अफसोसनाक पहलु यह है कि इसका कोई कारगर इलाज नहीं है। किसी बच्चे का इंसेफेलाइटिस का शिाकर होना और मौत से बच जाने का मतलब बाकी जिंदगी का मतलब केवल सांस भर लेना और जिंदा लाश बनकर रह जाना होता है।

पिछले 34 वर्षों में यह बीमारी लगभग 20 हजार से ज्यादा बच्चों की जान ले चुकी है। इस क्षेत्र में काम करने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओ की मानें तो यह आंकड़ा पिछले 34 वर्षों में 50 हजार का आंकड़ा पर कर चुका है। इस मौत से होन वाले आंकड़ों को पहली बार 1978 रिकार्ड किया गया था। उस वर्ष 1000 से ज्यादा बच्चें की मौत हुई थी। इसके बाद जब 2005 में बच्चों की मौतों की संख्या 1000 के पार पहुंची तो गोरखुपर से लेकर दिल्ली तक कोहराम मच गया। अकेले गोरखपुर स्थित बीआरडी मेडिकल कॉलेज के आंकड़ो की मानें तो इस साल की शुरूआत से अबतक 125 से ज्यादा बच्चे मौत के मुंह में जा चुके हैं। पिछले साल इंसेफेलाइटिस से मरने वाले बच्चों की संख्या 600 पार कर गई थी। यह तो वे आंकड़े हैं जो सरकार अपने यहां दर्ज करती है। बहुत से गरीब परिवार तो अपने बच्चों को अस्पताल तक नहीं ले जा पाते और उनके बच्चों की मौत सरकारी आंकड़ो में कोई जगह नहीं पाती। उल्लेखनीय है कि क इस बीमारी से पीडि़त होने वाले बच्चों में से लगभग 2 प्रतिशत ही शुरुआती स्थिति में मेडिकल कालेज तक पहुंच पाते हैं और बाकी गांव के डाक्टरों के भरोसे पर रहते है। मानसून शुरू होने को है और इंसेफेलाइटिस का दंश झेल चुके पूर्वांचल के गांव परिवार एक बार फिर सहम उठे हैं कि इस बार यह जापानी बुखार कितनों की बलि लेगा। यह कहना बिलकुल भी गलत नहीं होगा कि इंसेफेलाइटिस पूर्वांचल का शोक है। इंसेफेलाइटिस बुखार एक ऐसी डायन जिसे जेई, जापानी इंसेफेलाइटिस , मस्तिष्क ज्वर भोजपुरी में बड़की या नवकी बीमारी सहित न जाने कितने नामों से जाना जाता है। हालात यह हैं कि पूर्वांचल के लगभग सभी जिले इस बीमारी की जद में हैैं, लेकिन मरीजों को इलाज के लिये या तो गोरखपुर मेडिकल कॉलेज या वाराणसी बीएचयू में इलाज कराने जाना पड़ता है।

समस्या तब और गंभीर हो गई जब सरकार ने इंसेफेलाइटिस के नाम पर जैपनीज इंसेफेलाइटिस के टीककरण पर जोर दिया लेकिन एईएस की उपेक्षा कर दी। हालात यह हैं कि मौजूदा स्थिति में जेई पर तो लगभग पूरा नियंत्रण पाया जा चुका है लेकिन इनसेफालोपैथी सिंड्रोम (एईएस) के प्रकोप बढ़ता गया। इलाज के नाम पर सरकारी व्यवस्था का हाल यह है कि गोरखफर के बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में एक-एक बिस्तर पर तीन-तीन बच्चे इलाज के लिये पड़ रहते हैं। जिस जैपनीज इंसेफेलाइटिस को टीकाकरण के जरिये सरकार रोकने का दावा करती है, कायदे से उसके टीके कोल्ड चेन के जरिये सुरक्षित तरीके से संगहीत किये जाने चाहिये। लेकिन अगर गोरखुपर जिले का हाल देखें तो वहां किसी भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर न तो कायदे से बिजली की व्यवस्था है और न ही जनरेटर हैं। ऐसे में अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है संग्रहीत टीके बीमारी का प्रकोप शुरू होने के पहले ही बर्बाद हो चुके होते हैं।

हर साल सरकार की तरफ से वायदों का झुनझुना थमा दिया जाता है। इस बार के विधान सभा चुनावों में भी पूर्वांचल के वोटरों ने इंसेफेलाइटिस  को बड़ा मुद्दा बनाया था। हर बार की तरह यह वायदे और दावे राजनतिक पाटिंयों के घोषण पत्र तक ही सीमित रह गये। हालात यह है कि कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी को अपनी पार्टी के गिरते प्रदर्शन की चिंता के चलते विधान सभा चुनावों के दौरान पूर्वांचल का 5 बार दौरा करना पड़ा। लेकिन चुनावों के बाद न तो केंद्र की कांग्रेस सरकार ने इस इलाके की सुधि ली है और न ही राज्य सरकार ने। सूबे की राज्य सरकार पूर्वांचल के इस शोक का अंत करने के लिये किसी ठोस कदम की घोषण करने के बजाय पूर्ववर्ती मायावती सरकार की पत्थरों से बनी इमारतों और स्मारकों की गिनती में लगी हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब स्वास्थ्य विभाग घोटालों में डूब चुका हो और सरकार पत्थरों के मायाजाल में उलझी हो तो मासूमों को मौत के मुंह में ले जाने वाली इंसेफेलाइटिस से निजात कौन दिलायेगा?


Reported for Voice of Movement

Thursday, May 31, 2012


- घटिया समाग्री के उपयोग से बढ़ी रेल दुर्घटनायें
- रेलमंत्री को दिल्ली के बजाय कोलकाता रहना ज्यादा पसंद
- रेल सुरक्षा से संबंधित फाइलें रेल मंत्रालय में लटकीं

लखनऊ। पहले साल दो साल में रेल दुर्घटना हो जाती थी तो हंगामा मच जाता था। लेकिन भ्रष्ट और संवेदहीन होती व्यवस्था के चलते अब हर महीने या पखवाड़े बड़ी रेल दुर्घटनायें हो रही हैं और मरने वालों के परिवारों का करूण क्रंदन नकारी व्यवस्था केे नक्कारखाने में तूती की तरह हो गई है। हालात यह हैं कि एनडीए के शासनकाल में रेलवे सुरक्षा के लिये बना फड खत्म हो चुका है और रेलवे के आर्थिक हालत बिगड़ी हुई है। अभी हम्पी और बुधवार को इंदौर-रतलाम में हुई दुर्घटनाओं से आम जनता उबरी नहीं थी कि गुरूवार को जौनपुर के पास दून एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने की मनहूस खबर आई। श्ुरूआती दौर में रेलवे ने ठीकरा एस्सिटेंट लोको पॉयलट पर ठीकरा फोड़ा कि उसने इमर्जेंसी ब्रेक लगाये थे। तो वहीं वहीं पूर्व रेल मंत्री और तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ने बिना जांच हुये ही इसे तोडफ़ोड़ के कारण हुई दुर्घटना बता दिया। एक के बाद एक हो रही रेल दुर्घटनाओं के कारण के पीछे राजनीतिक कारण प्रमुख हैं। गठबंधन में चल रही यूपीए सरकार में रेल मंत्रालय को लेकर घमासान मचा हुआ है। दिनेश त्रिवेदी के जबरदस्ती लिये गये इस्तीफे के बाद रेल मंत्री बने मुकुल रॉय का अधिकतर समय कोलकाता में गुजर रहा है। अगर रेलवे बोर्ड के अधिकारियों की मानें तो रेल मंत्री महीने में कम से कम 25 दिन कोलकाता प्रवास पर रहते हैं। इसके चलते रेलवे सुरक्षा से जुड़ी कई फाइलें रेल मंत्रालय में पड़ी रेल मंत्री के नजरे इनायत होने की बाट जोह रही हैं। पिछले कुछ सालों में ट्रेनों के पटरियों से उतरने और एक-दूसरे से टकरा जाने के हादसों में अचानक बढ़ोतरी हुई है। रेलवे की ही विजलेंस टीम ने जब इन हादसों की जांच की तो बहुत ही खौफनाक सच सामने आया। जांच में पाया गया कि रेल पटरियां, ट्रेन के पहियों को टिकाने वाला हैंगर पिन और ब्रेक ब्लॉक दोयम दर्जे की गुणवत्ता के थे। पूरे मामले में सबसे दुखद पहलू यह रहा कि ब्रेक ब्लॉक और हैंगर पिन टूटने की घटनाओं में बढ़ोतरी के बाद भी रेलवे बोर्ड ने इस दिशा में कोई भी सार्थक कदम नहीं उठाया है। ये ऐसे पुर्जे हैं कि अगर चलती ट्रेन में टूटे तो दुर्घटना को रोना नामुमकिन है। भ्रष्टïचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि देश भर की टे्रनों में बहुतायत में घटिया पुर्जे लग चुके हैं और उन्हें एक साथ बदलना लगभग नामुमकिन है। जुलाई 2011 में कालका हादसे के बाद बनी परमाणु वैज्ञानिक डॉ.अनिल काकोदकर की अध्यक्षता वाली कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक अधिकतर रेलवे ट्रैक खराब हो चुके हैं। लगभग हर ट्रेन के यात्री डिब्बे निहायत ही असुरक्षित हैं। बरसों पहले बने रेलवे पुल जर्जर हो चुके हैं। कुल मिलाकर काकोदर कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में सुरक्षा की जो तस्वीर बनाई थी वह निहायत ही भयावह है। रेलवे में पटरियों की देखभाल करने वाले गैंगमैन, गेटमैन और ट्रेन चलाने वाले ड्राइवरों के करीब 24 हजार पद खाली हैं। इस कमेटी ने साफ कहा था किअगले दो-तीन साल तक कोई भी नई ट्रेन चलाने या ट्रेनों में बोगियां बढ़ाये जाने के बजाय रेलवे को अपना पूरा ध्यान सुरक्षा में लगाना चहिये। पिछले दिनों ही खबर आई थी कि सुरक्षा के नाम पर लगभग 15000 करोड़ रूपया और दशकों का समय नष्टï करने के बाद रेलवे के अधिकरियों ने भी मान लिया था कि रेल दुर्घटनाओं को रोकने के लिये वे जिस आटामेटेड सिस्टम पर काम कर रहे थे, वह भारतीय रेल के लिये कारगर नहीं है। इससे पहले हुई हर बड़ी दुघटना के बाद जांच की घोषण के साथ साथ एक रस्मी घोषणा होती रही है कि रेलवे की सुरक्षा को और प्रभावी बनाया जायेगा। पिछले महीने ही वॉयस ऑफ मूवमेंट ने पूर्वोत्तर रेलवे में उपकरणों की खरीद में हो रही धांधली के बारे में बताया था। ऐसे ही 1998 में लुधियाना के पास खन्ना में हुई रेल दुर्घटना के बाद बनी खन्ना जांच कमेटी ने पाया था कि रेल हादसे का कारण था दोयम दर्जे कीे रेल पटरियों का उपयोग। रेलवे के एक अध्किारी ने बताया कि रेल की पटरियों में कई वजह से खामियां आ रही हैं उनमें से प्रमुख है गुणवत्ता को न कायम रख पाना। जितने भी हादसे हो रहे हैं वह या तो दिन में पीक आवर्स में हो रहे हैं या फिर देर रात। यह दोनों ही समय ऐसे हैं जब वातावरण में बदलते तापमान के कारण पटरियां अपना फैलती या सिकुड़ती हैं। अगर पटरियों की गुणवत्ता कायम रखी गई होती तो पटरियां वातावारण के तापमान से इस हद तक प्रभावित न होतीं और अपना स्वरूप कायम रखतीं। जौनपुर हादसे मे भी शुरूआती दौर में जो कारण निकलकर आ रहें हैं, उनके मुताबिक एसिस्टेंट लोको पायलट ने पटरी को टेढ़ा देखकर इमर्जेंसी ब्रेक लगा दिये जिसके चलते सात बोगियां पटरी से उतर गईं और 7 यात्रियों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।

Reported for Voice of Movement, Dated June 1, 2012

Friday, December 30, 2011

लखनऊ। चुनावों कि आहट होते ही राजनीतिक वफादारी बदलने का क्रम शुरू हो चुका है। आयाराम गयाराम का बाज़ार गर्म है, सत्ता कि चाहत और टिकट काटने कि आहट के चलते देखते देखते बदली आस्थाओं का पहले खेल का नतीजा समाजवादी पार्टी के पक्ष में गया । कल तक मुलायम को कुनबा परस्त और सपा को उद्योगपतियों की रखैल कि संज्ञा से नवाजने वाले तथाकथित नेता व अपने कार्यों से चर्चित रहे पूर्व मंत्री नरेश अग्रवाल ने अपने पूरे राजनितिक कुनबे, समर्थकों कि भीड़ के साथ समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। सपा के पोस्टरों से गायब हो चुके लोहिया के चिंतन का समाजवादी पार्टी कार्यालय में नरेश के शामिल होने से अधूरा अध्याय भी पूरा हो गया।

इसी बीच मंत्री दद्दन मिश्र जो कल तक आयुर्वेद चिकित्सा राज्य मंत्री के पद का सुख भोग रहे थे, टिकट कटने की सुगबुगाहट के चलते अचानक नैतिकता का दबा कुचला पाठ याद आया और इससे पहले कि निकाले जाने वाले मंत्रियों कि फेरहिस्त में उनका नाम जुड़े, उन्होंने खुद ही इस्तीफा दे देना बेहतर समझा। इसके ठीक उलट समाजवादी पार्टी कार्यालय में उत्सवी माहाल था। बसपा से निष्काषित नरेश अग्रवाल दूसरी बार अपने 'घर' सपा में पूरे कुनबे के साथ लौट आये। सपा नेतृत्व ने भी पुराने मनमुटाव भुलाकर उनका स्वागत किया।



शुक्रवार को जैसा अपेक्षित था वैसा ही हुआ समाजवादी पार्टी ने नरेश अग्रवाल की उनके पुत्र नितिन सहित पार्टी में वापसी की औपचारिक घोषणा कर दी। नरेश अग्रवाल ने भी इस अवसर पर अपनी त्रुटियों के लिए सपा नेतृत्व से माफ़ी मांगी । इस अवसर पर सपा कार्यलय के प्रांगण में एक जनसभा का आयोजन हुआ। इस जनसभा में ही सपा के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने बसपा से निष्काषित सांसद नरेश अग्रवाल और उनके विधायक पुत्र नितिन अग्रवाल को समाजवादी पार्टी की सदस्यता दिलाई। इनके अलावा विधायक राजेश्वरी देवी, उनके भाई और पूर्व विधायक राजकुमार अग्रवाल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मुकेश अग्रवाल, वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष कामिनी अग्रवाल और गोंडा के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष शमीम अहमद ने भी पार्टी की सदस्यता ली । इससे पहले बसपा ने पिता पुत्र द्वय पर पार्टी विरोधी काम में शामिल होने का आरोप लगाते हुये निष्काषित कर दिया । नितिन पर विधायक निधि का दुरूपयोग करने और जनता के बीच जाकर कार्य न करने का आरोप भी था । माना जा रहा है कि बेटे का टिकट काटने से नरेश अग्रवाल बसपा नेतृत्व से खासे नाराज़ थे ।


उनके बगावती तेवर देखते हुये बसपा ने उनका और उनके पुत्र का निष्कासन करना ही उचित समझा । नरेश कि वापसी पर मुलायम सिंह यादव ने कहा कि अग्रवाल के फिर से पार्टी में आने से सपा को आने वाले विधानसभा चुनाव में मजबूती मिलेगी । हरदोई अग्रवाल के प्रभाव वाला इलाका है।

अग्रवाल वर्ष २००८ में बसपा में शामिल हुये थे और उन्हें मायावती ने उन्हें फर्रुखाबाद से लोकसभा का प्रत्याशी बनाया था । लोकसभा चुनाव हारने के बाद उन्हें बसपा ने राज्य सभा का सांसद बनवा दिया था। उस वक़्त नरेश अग्रवाल ने ५ सितारा होटल में हुये समारोह के अपने भाषण में मायावती को भारत का भावी प्रधानमंत्री और देश की कर्णधार कहकर संबोधित किया था। कुछ वैसे ही सुर आज भी सुनने को मिले लेकिन मुलायम सिंह को उत्तर प्रदेश का मुख्या मंत्री बनाने का दावा किया।

Reported By Anurag Tiwari for Voice of Movement

लखनऊ। चुनावों कि आहट होते ही राजनीतिक वफादारी बदलने का क्रम शुरू हो चुका है। आयाराम गयाराम का बाज़ार गर्म है, सत्ता कि चाहत और टिकट काटने कि आहट के चलते देखते देखते बदली आस्थाओं का पहले खेल का नतीजा समाजवादी पार्टी के पक्ष में गया । कल तक मुलायम को कुनबा परस्त और सपा को उद्योगपतियों की रखैल कि संज्ञा से नवाजने वाले तथाकथित नेता व अपने कार्यों से चर्चित रहे पूर्व मंत्री नरेश अग्रवाल ने अपने पूरे राजनितिक कुनबे, समर्थकों कि भीड़ के साथ समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। सपा के पोस्टरों से गायब हो चुके लोहिया के चिंतन का समाजवादी पार्टी कार्यालय में नरेश के शामिल होने से अधूरा अध्याय भी पूरा हो गया।

इसी बीच मंत्री दद्दन मिश्र जो कल तक आयुर्वेद चिकित्सा राज्य मंत्री के पद का सुख भोग रहे थे, टिकट कटने की सुगबुगाहट के चलते अचानक नैतिकता का दबा कुचला पाठ याद आया और इससे पहले कि निकाले जाने वाले मंत्रियों कि फेरहिस्त में उनका नाम जुड़े, उन्होंने खुद ही इस्तीफा दे देना बेहतर समझा। इसके ठीक उलट समाजवादी पार्टी कार्यालय में उत्सवी माहाल था। बसपा से निष्काषित नरेश अग्रवाल दूसरी बार अपने 'घर' सपा में पूरे कुनबे के साथ लौट आये। सपा नेतृत्व ने भी पुराने मनमुटाव भुलाकर उनका स्वागत किया।



शुक्रवार को जैसा अपेक्षित था वैसा ही हुआ समाजवादी पार्टी ने नरेश अग्रवाल की उनके पुत्र नितिन सहित पार्टी में वापसी की औपचारिक घोषणा कर दी। नरेश अग्रवाल ने भी इस अवसर पर अपनी त्रुटियों के लिए सपा नेतृत्व से माफ़ी मांगी । इस अवसर पर सपा कार्यलय के प्रांगण में एक जनसभा का आयोजन हुआ। इस जनसभा में ही सपा के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने बसपा से निष्काषित सांसद नरेश अग्रवाल और उनके विधायक पुत्र नितिन अग्रवाल को समाजवादी पार्टी की सदस्यता दिलाई। इनके अलावा विधायक राजेश्वरी देवी, उनके भाई और पूर्व विधायक राजकुमार अग्रवाल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मुकेश अग्रवाल, वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष कामिनी अग्रवाल और गोंडा के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष शमीम अहमद ने भी पार्टी की सदस्यता ली । इससे पहले बसपा ने पिता पुत्र द्वय पर पार्टी विरोधी काम में शामिल होने का आरोप लगाते हुये निष्काषित कर दिया । नितिन पर विधायक निधि का दुरूपयोग करने और जनता के बीच जाकर कार्य न करने का आरोप भी था । माना जा रहा है कि बेटे का टिकट काटने से नरेश अग्रवाल बसपा नेतृत्व से खासे नाराज़ थे ।

Reported by Anurag Tiwari for Voice of Movement


उनके बगावती तेवर देखते हुये बसपा ने उनका और उनके पुत्र का निष्कासन करना ही उचित समझा । नरेश कि वापसी पर मुलायम सिंह यादव ने कहा कि अग्रवाल के फिर से पार्टी में आने से सपा को आने वाले विधानसभा चुनाव में मजबूती मिलेगी । हरदोई अग्रवाल के प्रभाव वाला इलाका है।

अग्रवाल वर्ष २००८ में बसपा में शामिल हुये थे और उन्हें मायावती ने उन्हें फर्रुखाबाद से लोकसभा का प्रत्याशी बनाया था । लोकसभा चुनाव हारने के बाद उन्हें बसपा ने राज्य सभा का सांसद बनवा दिया था। उस वक़्त नरेश अग्रवाल ने ५ सितारा होटल में हुये समारोह के अपने भाषण में मायावती को भारत का भावी प्रधानमंत्री और देश की कर्णधार कहकर संबोधित किया था। कुछ वैसे ही सुर आज भी सुनने को मिले लेकिन मुलायम सिंह को उत्तर प्रदेश का मुख्या मंत्री बनाने का दावा किया।

Reported By Anurag Tiwari for Voice of Movement

Thursday, December 29, 2011

-पांच विधयाकों और एक मंत्री के खिलाफ लोकायुक्त में शिकायत

भ्रष्टाचार के खिलाफ बने माहौल और लगातार मंत्रियों -विधयाकों के खिलाफ हो रही लोकायुक्त जांच और कार्रवाई के चलते अब लोकायुक्त कार्यालय में माननीयों के खिलाफ शिकायतों कि लाइन लग गयी है। गुरुवार को लोकायुक्त कार्यालय में ५ विधयाकों और एक मंत्री जी के खिलाफ भ्रस्ताचार कि शिकायत पहुंची। बेसिक शिक्षा मंत्री धरम सिंह सैनी के खिलाफ लोकायुक्त कार्यालय में दूसरी बार शिकायत पहुंची है। लोकायुक्त ने मडियाहूँ के विधायक केके सचन के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और जांच के आदेश दे दिए हैं।

गुरुवार को लोकायुक्त कार्यालय में एक बार फिर शिकायतों कि फेरहिस्त पहुंची। इस फेरहिस्त में एक शिकायत बेसिक शिक्षा मंत्री धरम सिंह सैनी के खिलाफ भी शिकायत थी। उन पर आरोप है कि उनकी सरपरस्ती में रामपुर के बेसिक शिक्षा अधिकारी नरेन्द्र पाल सिंह लिप्त हैं। इस मामले में शिकायतकर्ता जनपद रामपुर निवासी अमित कुमार ने आरोप लगाया है कि बेसिक शिक्षा अधिकारी खुलेआम रिश्वत मांगते हैं और प्रतिरोध करने पर कहते हैं कि उन्हें मंत्री धर्म सिंह सैनी को भी हिस्सा पहुँचाना है। अमित कुमार ने इस शिकायत में मंत्री और बीएसए दोनों को ही आरोपी बनाया है। शिकायतकर्ता अमित कुमार कि पत्नी अलका गुप्ता जनपद रामपुर के बिलासपुर ब्लाक के सिकरौरा पूर्व माध्यमिक विद्यालय में सहायक अध्यापिका हैं। अमित कुमार ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि बीएसए उनकी पत्नी के खिलाफ मनमाने तरीके से प्रतिकूल प्रविष्टि कर उनको मानसिक रूप से परेशान कर रहा है। इस बाबत जब उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी तो वह भी उन्हें प्राप्त नहीं हुई। इसके अलावा अमित कुमार ने यह भी आरोप लगाया है कि बीएसए ने वर्ष २०१० और २०११ के जून जुलाई के महीने में अध्यापकों के संयोजन के नाम पर जनपद में तैनात शिक्षकों से लाखों रुपये वसूले हैं। अमित कुमार का कहना है कि जब इस वसूली के बाबत उन्होंने बीएसए से पूछा तो उसने बेसिक शिक्षा मंत्री धर्म सिंह सैनी का नाम लेते हुये कहा कि उनका हिस्सा भी तो पहुँचाना है। लोकायुक्त ने इस मामले को प्रारंभिक जांच के लिए अग्रसारित कर दिया है। ज्ञात रहे कि वर्ष २००९ में भी लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा ने जांच कर अपनी टिपण्णी दी थी कि मंत्री जी का आचरण एक भ्रष्ट बेसिक शिक्षा अधिकारी को बचाने में संदिग्ध है इसलिए माननीय मुख्यमंत्री इसमें मंत्री के खिलाफ़ कार्रवाई करें।

इसके अलावा गुरुवार को ही लोकायुक्त कार्यालय में बसपा के पांच विधायकों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत पहुंची। इनमे से एक के खिलाफ लोकायुक्त ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दोआबा से विधायक सुभाष यादव के खिलाफ विजयकांत ने, नाथूपुर से विधयक उमेश चन्द्र पाण्डेय के खिलाफ पवन कुमार ने, बरसठी से विधायक रविन्द्र के खिलाफ तारा ने, आगरा पश्चिम से विधायक गुटियारी लाल दुबेश के खिलाफ सुभाष चन्द्र और मडियाहूँ से विधायक केके सचान के खिलाफ अर्चना सिंह ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुये शिकायत की है। केके सचन के ऊपर लगे आरोपों के सम्बन्ध में प्रस्तुत किये गए साक्ष्य के आधार पर लोकायुक्त ने उनके खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू करने के निर्देश दे दिए हैं।

Reported by Anurag Tiwari for Voice of Movement

Wednesday, December 28, 2011

लखनऊ। माया मंत्रिमंडल के ऊपर मंडरा रहे भ्रष्टाचार के काले बदल छंटने का नाम नहीं ले रहे। लोकायुक्त की जांच की बिजलियाँ लगातार माया के मंत्रिमंडल सहयोगियों पर गिर रहीं हैं। बुधवार को लोकायुक्त ने राज्य के लघु उद्योग मंत्री चन्द्रदेव राम यादव को हटाने की संस्तुति मुख्यमंत्री के पास भेज दी। दूसरी तरफ एक और मंत्री के खिलाफ लोकायुक्त ने मामला दर्ज कर प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। बुधवार को ही विधानसभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर के खिलाफ लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज करायी गयी।

कैबिनेट मंत्री चंद्रदेव राम यादव ने लोकायुक्त को दिए गए बयान में स्वीकार करने के बाद कि उन्होंने मंत्री रहते हुए हेडमास्टर का वेतन लिया है, बिजली गिरनी तय थी। बुधवार को लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा ने मीडिया से बात करते हुये बताया कि उन्होंने चंद्रदेव राम यादव को कैबिनेट से हटाने की संस्तुति मुख्यमंत्री कार्यलय को भेज दी है। इससे पहले मंत्री ने लोकायुक्त के सामने यह स्वीकार किया था कि वह 2006 से बतौर हेडमास्टर का वेतन ले रहे हैं। उनकी दलील थी कि उन्हें इस बात की विधिक जानकारी न होने की वजह से उनसे यह भूल हुई है। मंत्री जी पर यह भी आरोप था कि उन्होंने अपने परिवार के लिए १० शस्त्र लाइसेंस बनवाए हैं। इस तथ्य पर मंत्री जी कि दलील थी कि उनका परिवार काफी बड़ा है, इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से इतने शस्त्र लाइसेंस लेना जरूरी था। इस मामले में आजमगढ़ के इंद्रासन सिंह, जय प्रकाश सिंह व राधेश्याम सिंह ने संयुक्त रूप से लघु उद्योग मंत्री चंद्रदेव के खिलाफ शिकायत की थी।

जस्टिस मेहरोत्रा ने अपनी संस्तुति में मुख्यमंत्री को लिखा है कि मंत्री जी ने भारतीय संविधान की शपथ लेने के बाद भी अपने दायित्वों का सही से निर्वहन नहीं किया है और भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए हैं, ऐसे में इन्हें तत्काल मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया जाना चाहिए । उन्होंने मंत्री रहते बतौर काशी माध्यमिक विद्यालय के हेडमास्टर जितनी भी राशि वेतन के रूप में ली है, उसे बैंक के ब्याज दर से वसूला जाए। अध्यापकों के वेतन खाता शीघ्र खुलवाया जाए। इसके अलावा समाज कल्याण विभाग से काशी माध्यमिक विद्यालय में कार्यरत अध्यापकों की संख्या और अध्ययनरत विद्यार्थियों की जांच करायी जाये। मंत्री जी के प्रभाव से जिन ६ अध्यापकों की नियुक्ति हुयी है उसकी भी जांच करायी जाये, यदि जांच में यह नियुक्तियां गलत तरीके से की गयीं पायी जाएँ तो इन्हें तुरंत निरस्त किया जाये। लोकायुक्त ने उन अधिकारीयों के खिलाफ भी टिपण्णी की है जिनकी मिलीभगत से २००४ के शासनादेश का उल्लंघन करते हुये अध्यापकों के खाते न खुलवा कर मंत्री जी बतौर हेडमास्टर वेतन अपने खाते में जमा करवाते रहे । लोकायुक्त ने तकालीन जिलाधिकारी मनीष चौहान की भी भूमिका को संदिग्ध माना है और उनके खिलाफ भी जांच के निदेश दिया हैं। लोकायुक्त ने वर्ष २००६ से आजमगढ़ बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में तैनात वित्त एवं लेक्जधिकारियों कि भूमिका की भी जांच करने कि संस्तुति दी है, जिन्होंने वेतन के कागजात पर हस्ताक्षर कर उसे अनुमोदित किया था। अपने परिवार के नाम पर कई असलहा लाईसेंस बनवाने के मामले में लोकायुक्त ने लिखा है कि २००७ के बाद से मंत्री जी और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर जितने भी असलहा लाईसेंस निर्गत हुये हैं, उनकी जांच मंडलायुक्त से करवाई जाये। इसके अलवा उन्होंने मंत्री द्वारा वर्ष २००७ के बाद से जितनी भी संपत्ति अर्जित कि है उसकी जांच भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत कराने की संस्तुति करते हुये लिखा है कि जांच की रिपोर्ट ६ सप्ताह में उनके सामने पेश की जाये।

हालाँकि इस मामले में मंत्री चंद्रदेव राम यादव ने अपने सभी दांव आजमाये और लोकायुक्त के अधिकार को चुनौती देते रहे लेकिन लोकायुक्त के सामने दिया गया बयान ही उनके लिए गले का फंदा बन गया। स्वयं सिद्ध होने वाले साक्ष्यों के चलते इस मामले में रिकार्ड समय में लोकायुक्त का फैसला आया है।

इसके अलावा माया मंत्रिमंडल में तकनीकी शिक्षा मंत्री और गोरखपुर के बांसगांव से विधायक सदल प्रसाद के खिलाफ लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार का एक मामला दर्ज किया है । मंत्री जी खिलाफ राम कमल यादव ने लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराते हुये भरष्टाचार के आरोप लगाये थे। सदल प्रसाद के ऊपर ट्रस्ट बनाकर अकूत संपत्ति अर्जित करने और पद का दुरुपयोग करते हुये सरकारी जमीनों पर कब्ज़ा करने का आरोप है। लोकायुक्त ने इस मामले में अपनी जांच शुरू कर दी है और सदल प्रसाद को अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। लोकायुक्त ने बाते कि मंत्री जी को मामला दर्ज करने से पहले दो बार समय दिया गया था लेकिन उन्होंने प्रारंभिक जांच में अपना पक्ष प्रस्तुत नहीं किया है। मामला दर्ज होने के बाद मंत्री जी को अपना पक्ष रखने के लिए १५ दिनों का समय दिया गया है.

उधर मंगलवार शाम को लोकायुक्त कार्यालय में विधान सभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी गयी। शिकायतकर्ता आजमगढ़ निवासी सुनील राय ने विधान सभा अध्यक्ष पर आय से अधिक संपत्ति और पद का दुरुपयोग करते हुये अपने परिवार के ट्रस्ट को फायदा पहुंचाने का आरोप है। विधानसभा अध्यक्ष पर आरोप है कि उन्होंने लोगों को डरा धमका कर उनकी जमीनों का बैनामा अपने परिवार के सदस्यों के नाम करवा लिया है। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगे है कि उन्होंने अपनी विधायक निधि का ज्यादातर पैसा अपने माँ और पिता के नाम से चल रहे ट्रस्ट के विद्यालय में दिया है। लोकायुक्त ने कहा कि इस मामले कि प्रारम्भिक जांच और साक्ष्यों कि पुष्टि के बाद ही मामला दर्ज होगा।

Reported by Anurag Tiwari for Voice of Movement

Tuesday, December 27, 2011

लखनऊ. बाबू सिंह कुशवाहा ने अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के मामलों में लोकायुक्त से निवेदन किया है कि उनके खिलाफ ल्कोयुकता द्वारा जांच रोक दी जाये. उन्होंने हाई कोर्ट में इसी तरह के मामले में रिट दाखिल होने के कारण यह निवेदन किया है. लोकायुक्त ने इस मामले के कागजात तलब किये हैं और कहा कि पुष्टि होने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा.

उधर गोंडा के विधायक रमेश गौतम के खिलाफ शिकायत करने पर शिकायतकर्ता को अपहृत कर जाने से मारने की के आरोप को लोकायुक्त ने गंभीरता से लिया है. लोकायुक्त ने प्रार्थी के शःपथ्पत्र और शिकायत को गोंडा के पुलिस अधीक्षक को जांच के लिए भेज दिया है. साथ ही लोकायुक्त ने विधायक के खिलाफ अपने यहाँ मामला दर्ज कर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच शुरू कर दी है.

गोंडा निवासी राजेश कुमार सिंह ने विधायक रमेश गौतम के खिलाफ भार्स्ताचार के आरोप लगाये हैं. इन आरोपों में उन्होंने कहा है कि चुनाव के समय शपथ पत्र दिया था कि उनके पास बैंक में लगभग ५०० रुपये ही हैं. जबकि विधयक बनते ही ६ महीनों के अन्दर उन्होंने ६ लाख रुपये कि जमीन और स्कार्पियो गाडी खरीदी थी. इसके अलावा विधायक कि पत्नी पर भी आरोप है कि वह सरकारी प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापिका होते हुए भी मान्यता प्राप्त विद्यालय की कोषाध्यक्ष भी हैं. इसके अलावा सरकारी वेतन कम होने के बाद भी हर महीने तीन तीन गाड़ियों की ५० हज़ार रुपयों की किश्त जमा कर रही हैं.

Reported by Anurag Tiwari for Voice of Movement

लोकायुक्त जांच में फंसे बसपा में नंबर दो की हैसियत वाले नसीमुद्दीन के लिए हर रोज़ मुश्किलें बढती ही जा रही हैं. लोकायुक्त के जांच शुरू करने के बाद से इस मामले में रोज़ नए साक्ष्य सामने आ रहे हैं.

नसीमुद्दीन सिद्दकी के खिलाफ खनन पत्तों और मनरेगा योजना के तहत बंटने वाले ट्रैक्टर, थ्रेशर और होवर की बन्दर बाँट के मामले में शिकायतकर्ता जगदीश नारायण शुक्ला ने अपना परिवाद दाखिल करते हुए कई साक्ष्य प्रस्तुत किये हैं. इस मामले में लोकायुक्त ने यूपी अग्रो के एमडी एनएल गंगवार को तलब किया था, लोकायुक्त ने उनसे लाभार्थियों की सूची मांगी थी. गंगवार ने अपनी असमर्थता जताए हुए कहा की यह अभिलेख जनपद स्टार पर सर्विस अभियंता के पास ही उपलब्ध होते हैं इसलिए वे इसे उपलब्ध नहीं करा पायेंगे. इस मामले में लोकायुक्त ने अब सर्विस अभियंता जहूर और मंडलीय अभियंता अवधेश कुमार को बुधवार को अपने कार्यालय में तलब किया है.

नसीमुद्दीन के ही दूसरे मामले में मंगलवार को बांदा, हमीरपुर, महोबा और चित्रकूट के खनन अधिकारीयों ने लोकायुक्त के सामने अपना बयां दर्ज कराया है. इस मामले में नया मोड़ यह आया है कि नस्सेमुद्दीन के प्रभाव में ५ हेक्टेयर से बड़े जो भी प्लाट उनके रिश्तेदारों को आव्नातित किये गए थे, उन पर भारत सरकार्र के पर्यावरण मंत्रालय के निर्देशों के बाद भी अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लिए गए थे.

उधर नसीमुद्दीन की पत्नी हुस्ना सिद्दकी के मामले में नसीमुद्दीन द्वारा बेनामी संपत्ति लिए जाने का मामला सामने आया है. शिकायतकर्ता जगदीश नारायण शुक्ला ने साक्ष्य के रूप में लोकायुक्त के सामने कुछ कागजात प्रस्तुत किये. इन कागजातों के अनुसार नसीमुद्दीन सिद्दकी ने मूलचंद लोधी उर्फ़ मामू को पहले अपना सहयोगी बनाया फिर उसका अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनवा दिया. आरोप यह है कि नसीमुद्दीन ने मामू के जरिये बाराबंकी के गंगवारा, मितई बढेरा झील क्षेत्र में अकूत संपत्ति खरीदी है. नसीमुद्दीन ने मामू के बेटे कि नियुक्ति आबकारी विभाग में ड्राईवर के पद परा करवाई जिसके जरिये भी उन्होंने लगभग २०० बीघा जमीन खरीदी गयी जो कि दिन्दौर फतेह्फुर में क्युएफ़ एजुकेशनल ट्रस्ट की जमीन से सटा हुआ प्लाट है. इसके अलावा हुस्ना के भाई राजू ने भी ५० बीघे की जमीन अपने नाम पर खरीदी है, वह भी क्युएफ़ एजुकेशनल ट्रस्ट की जमीन के बगल में ही है. जगदीश नारायण शुक्ला ने आरोप लगाया कि लोकायुक्त कार्यालय में नसीमुद्दीन के खिलाफ शिकायत करने के बाद से उन्हें जान से मारने कि धमकियां मिल रहीं हैं .

Reported by Anurag Tiwari for Voice of Movement

माया मंत्रिमंडल के सदस्यों के ऊपर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोप थमने का नाम नहीं ले रहे. जिस तरह से एक के बाद एक मंत्रियों के खिलाफ लोकायुक्त की जांच और संस्तुति आ रही है, यह भ्रष्टाचार के मामलों में यह मंत्रिमंडल कीर्तिमान बनाने की ओर निरंतर अग्रसर है. मंगलवार की लोकायुक्त ने मायावती मंत्रिमंडल के दो और मंत्रियों और एक विधायक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

इस बार लोकायुक्त की जांच के घेरे में माया मंत्री मंडल के दो प्रभावशाली मंत्रीगण आये हैं. इनके नाम हैं वन मंत्री फ़तेह बहादुर सिंह और खाद्य मंत्री राम प्रसाद चौधरी. इसके अलावा बसपा के एक विधायक रमेश गौतम के खिलाफ भी लोकायुक्त ने मामला दर्ज कर लिया है. लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा ने बताया कि वन मंत्री फ़तेह बहादुर सिंह के खिलाफ सत्य नारायण यादव ने शिकायत दर्ज करायी थी. इस मामले में अभी तक मंत्री जी को समय दिए जाने के बाद भी, उन्होंने अपना पक्ष प्रस्तुत नहीं किया. जिसके बाद लोकायुक्त ने मामले को दर्ज कर इसकी जांच शुरू कर दी है. वन मंत्री फ़तेह बहादुर के ऊपर आरोप है की उन्होंने अपने पद का दुरूपयोग करते हुए अपने सगे सम्बन्धियों को फायदा पहुँचाया है. उनके ऊपर सर्कर्री जमीनों पर अवैध कब्ज़ा करने का भी आरोप है. शिकायतकरता ने लोकायुक्त कार्यालय में दिए गए अपने पत्र में कहा है की वन मंत्री ने अपने पद का दुरूपयोग करते हुए अपनी पत्नी जो की गोरखपुर में जिला पंचायत हैं उनको फायदा पहुँचाया है. आरोप में कहा गया है की उत्तर प्रदेश वन निगम ने कुछ कार्यों के लिए टेंडर जारी क्या था जिसमें ८.१० करोड़ रुपये सड़क की इंटरलाकिंग के लिए, १.६६ करोड़ रुपये नाली के निर्माण के लिए और २.४ करोड़ रुपये हैण्ड पम्प लगवाने के लिए अनुमोदित किये गए थे. आरोप यह है की मंत्री जी ने अपनी पत्नी को फायदा पहुंचाने के लिए जिला परिषद् गोरखपुर को कार्यदायी संस्था बनाकर उसे यह कार्य उसे दे दिया. इस मामले की जांच में यह पता चला कि मंत्री जो कि पहले अपने आपको वन निगम में किसी पद पर नहीं बता रहे थे, उपरोक्त सभी कार्य उत्तर प्रदेश वन निगम ने उन्हीं की अध्यक्षता में जिला परिषद, गोरखपुर को आवंटित किये. यह तथ्य वन निगम के अधिकारीयों ने लोकायुक्त के सामने रखे. उधर जिला परिषद के अधिकारीयों ने गोलमोल जवाब देते हुए लोकायुक्त के सामने यह बात रखी कि कार्य में अनियमितता पाए जाने के बाद इस कार्य का टेंडर निरस्त कर दिया गया है. लोकायुक्त ने मामले को दर्ज कर वन मंत्री को १५ दिनों में अपना पक्ष प्रस्तुत करने को कहा है.

उधर दूसरे मामले में मायावती मंत्रिमंडल में खाद्य मंत्री राम प्रसाद चौधरी के खिलाफ भी लोकायुक्त ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. खाद्य मंत्री के खिलाफ रमेश तिवारी ने लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज करायी थी. खाद्य मंत्री राम प्रसाद चौधरी राजनीति में आने से पहले अपनी खुद कि राईस मिल और अपनी ट्रांसपोर्ट कम्पनी चलाते थे. खाद्य मंत्री पर आरोप है कि मंत्री बनने के बाद उन्होंने खाद्य मंत्रालय के नियमों को अपने रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए परिवर्तन किये. उन पर आरोप है कि उन्होंने खाद्य मंत्रालय में ढुलाई के काम के लिए रजिस्टर होने वाले ट्रांसपोर्टरों के लिए नियम ऐसे बनाये जिससे केवल उनके रिश्तेदार ही रजिस्ट्रेशन करवा पायें. इसके लिए शासनादेश खाद्य आयुक्त से जारी करवाया गया. जिसके चलते इनके रिश्तेदारों ने अनुमोदित टेंडर रेट से कहीं जयादा रेट टेंडर में डाले जो कि नियमनुसार रेट से ५० प्रतिशत तक अधिक थे. मंत्री जी ने नए नियमों का फायदा उठाकर अपने ट्रक भी इस कार्य में लगा लिए. इसके बाद ठेकेदारों ने खाद्य मंत्रालय में अनापशनाप बिल प्रस्तुस्त किये जिनका भुगतान भी मंत्री जी के प्रभाव से हो गया. मामला लोकायुक्त कार्यालय में पहुँचने के बाद खाद्य मंत्रालय के अफसरों ने दावा किया कि ज्यादा बिल अनुमोदित होने के मामले में सम्बंधित ट्रांसपोर्टरों से रिकवरी कर ली गयी है. लोकायुक्त ने कहा कि रिकवरी कि दलील कि जांच होनी है. इसके अलावा मंत्री जी के ऊपर यह भी आरोप है कि उन्होंने खाद्य मंत्री रहते अपने राईस मिल में धान की कुटाई हुए बिना ही इस कार्य का भुगतान करवा दिया.

Reported by Anurag Tiwari for Voice of Movement

Wednesday, January 20, 2010

नीलकंठ बनकर हम बेबस ज़हर पीते रहे;
हुकमरानो की दी हुई मौत को ज़िन्दगी समझ जीते रहे.

समेट पाते कैसे खुदा की नेमत और दी हुई खुशी को,
अँधेरे में आंसुओं से अपना चाक दमन सीते रहे.

एक सभ्य भये ओसामा भैया, एक भई तालिबानी फ़ौज,
एक सभ्य भये ठाकरे काका, पीट गंवई भतीजा करे मौज.

श्री राम पीट रहीन माथा आपन, लो फिर पद गए लेने के देने,
पूछें, भईया मुथालिक हमने कब कड़ी की ऐसी श्री राम सेने.

कौन सभ्यता में पैदा भयें इ बड़का बड़का दानव,
जानवरन से करम करें , कहें अपने का मानव.

वो जो हुआ करते थे, अब नहीं हैं.
जिन्हें देख लोग खुश थे, अब नहीं हैं.
जिन्हें देख लोगों को जलन होती थी, अब नहीं हैं.
वो खुद में खुश रहा करते थे, अब नहीं हैं..

उन्होंने कल ख़ुदकुशी कर ली...

कल रात सुनसान गली में मिले मुझे इलाके के डान,
प्रणाम किया, हाथ जोड़े, विनती की, बख्श दो मेरी जान.

उस्ताद नया हूँ, मिला कोई शिकार आपको बातऊँगा,
आइन्दा भूलकर भी आपके रास्ते में ना आऊंगा.

बोले गुंडास्वामी, बख्श दिया तू नया नवेला है,
जा भाग, याद रख, आज से तू मेरा चेला है.

मिलें जो कहीं गुंडास्वामी, अवश्य झुक प्रणाम करें,
सत्ता में ये कल जाने कौन मंत्री का नाम धरें.

कुछ तो पहले गुंडे थे, अब सत्ता में नेता हो गए,
कुछ सत्ता पाकर इस समुदाय के प्रणेता हो गए.

पर उपदेश कुशल बहुतेरे,
चचा ओबामा ज़रा इधर मुंह फेरें

बहादुरी की देंगे न हांको,
कभी अपने अन्दर भी झांको.

पाकिस्तान मांग के तुमसे खाता,
हुकुमउदूली के डंके बजाता.

वो तुम्हे है जान से प्यारा,
तुम्हारी आँखों का तारा.

अफगानिस्तान तक भाग के आये,
तुम्ही जानो क्या उखाड़ पाए.

WMD का तुम अंश ना पाए,
ईराक में यू हीं विध्वंश मचाये.

अब आई है ईरान की बारी,
उसने कब खोली भैंस तुम्हारी.

'अर्थशास्त्री' को 1-2-3 बहुत पढवाया,
परमाणु कचरा ठिकाने लगवाया..

जवाबदेही दुनिया की, प्रदूषण तुम करो,
शोषितों का रक्त-चूषण तुम करो.

कोपेनहेगन में जनाजा निकलवाया,
प्रदूषण दूर कर के नाम पर और प्रदूषण फैलवाया

सुबह पापा का उस पर दफ्तर जाना,
टोल क्स एक क्कर हमें घुमाना.

शाम को उसका टैक्सी बन जाना,
रास्ते में रुक-रुक तन जाना.

सीधे तो कोई बात ना होती,
बिना टेढ़े हुए स्टार्ट ना होती.

सच है, जो कल था वो नहीं है आज,
अब तो यादों में ही मिलेगा हमारा बजाज.

(A tribute to BAJAJ Scooters)

प्रीत में मत पडियो मेरे मीत,
प्रीत जाएगी जीत, तू जायेगा बीत.

अब बस गीतों में बसे कहीं प्रीत,
प्रीत हुई सजातीय, बेतुकी रीत गयी जीत.

कहाँ मिलती अब जन्मो की प्रीत,
समझो गनीमत, एक जनम जो जाये बीत.

मोबाइल सेट से पहले बदलें मनमीत,
चैट पर बने रिश्ते, SMS पे जाएँ बीत.

प्रीत हुई अब इंडो-पाक बात-चीत,
वर्तमान धुंधला, भविष्य बना अतीत.

अंसुअन की धार है या बदरा का प्यार
जग तनिक भी खबर ना पाए

गिर कर आँगन से जो चोट पाए,
पानी आँगन को सहलाए.

आँगन बूंदों से चोट खाए,
पानी को गोद में ले सामये

गुमसुम आँगन बदरा निहारे,
तडपे पानी भी, जब सूखा पड़ जाए.

आँगन की बरसात में, पानी भीगा जाए,
आँगन सूना ही रहे, पानी आंसू बहाए..

प्यार है तकरार है, क्या रिश्ता है,
ये कविवर कभी समझ ना पाए.