Wednesday, August 22, 2012

यह यूपी पुलिस है या बैंड-बाजे वाले



-जिन्हें पैसे नहीं मिले, वे दौड़ प्उ़े विधायक जी की गाड़ी के पीछे
- सरकार ने नहीं लिय विधायक के खिलाफ कोई एक्शन, 3 पुलिसवाले सस्पेंड 
लखनऊ। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनके पिता मुलायम सिंह यादव भले कितने दावे कर लें कि प्रदेश में कानून व्यवस्था सुधर जाएगी, लेकिन हालात बिलकुल इसके उलट हैं। कभी अधिकारी तो कभी सत्ताधारी पार्टी सपा के विधायक और मंत्री कोई न कोई ऐसा आचरण कर बैठते हैं जिसके चलते सपा सरकार की छवि धूतिल हो चुकी है। ताजा मामला भदोही से विधायक विजय मिश्रा का है। सोमवार  को नैनी जेल से बाहर आते समय विजय मिश्राा की बेटी ने जेल के बाहर मौजूद पुलिसवालों को पैसे बांटे। पैसे लेने के लिए पुलिसवालों में होड़ मची हुई थी और वे आपस में धक्कामुक्की कर रहे थे। लेकिन यह सारा कृत्य कैमरे पर कैद हो गया और जनता को उनका असली चेहरा दिख गया। 

सोमवार को नैनी जेल के बाहर एक बार फिर यूपी पुलिस का घिनौना चेहरा देखने को मिला। इससे साफ हो गया कि यूपी पुलिस न केवल पैसे के पीछे पागल है बल्कि खैरात में मिलने वाले पैसे के लिए किसी भी हद तक जा सकी है। समाजवादी पार्टी के बाहुबली विधायक विजय मिश्रा सोमवार को इलाहाबाद के नैनी सेंट्रल जेल से रिहा हुए। उनकी रिहाई के समय सैकड़ों की संख्या में उनके समर्थक उनके आगवानी में लग गये। डेढ़ साल बाद जेल से बाहर आने के बाद विजय मिश्रा का परिवार इतना खुश हुआ कि उन्होंने जेल के बाहर इस तरह से पैसे लुटाना शुरु कर दिया जैसे कि शादी ब्याह में बैड-बाजे और नाचने वालों को पैसे दिए जाते हैं। लेकिन यह पैसे लेने वाले न तो नाचने-गाने वाले थे और न ही बैंडबाजे वाले। यह पैसा लेने की होड़ में लगे थे यूपी पुलिस के कांस्टेबल। पिता की जेल से रिहाइ्र से खुश विजय मिश्रा की बेटी सीमा मिश्रा तो इतनी खुश हुईं कि पुलिसकर्मियों को बख्शीश देने से भी नहीं चूकीं। जेल के बाहर ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी ने जैसे ही विजय मिश्रा को सलाम किया उनकी बेटी ने उसके हाथ में 500 का नोट थमा दिया। नोट हाथ में आते ही पुलिसकर्मी वहां से चला गया। इसके बाद तो वहां पैसा लेने के लिए पुलिसवालों में होड़ मच गई। एक न्यूज चैनल पर दिखाये गये वीडियो के मुताबिक बाहुबली विधायक विजय मिश्रा की बेटी पुलिसवालों को पांच पांच सौ रुपये के नोट बख्शीश के तौर पर दे रही हैं। यही नहीं जिन पुलिसवालों को पैसे नहीं मिले वह बारात के पीछे भाग रहे बच्चों की तरह नोट लेने के लिए विजय मिश्रा की उसयूवी के गाड़ी के पीछे-पीछे दौड़ पड़े।

इस तरह पुलिसवालों को नेग की रकम लेने के लिए पागल होते देख, इस बात का अंदाजा तो हो ही जाता है कि वो जेल में भी नेताजी की सुख-सुविधा का कितना ख्याल रखते होंगे। उल्लेख्नीय है कि सपा विधायक विजय मिश्रा पर 60 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। पिछले डेढ़ साल से मायावती सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे नंद गोपाल गुप्ता नंदी पर जुलाई 2010 में हुए हमले के मामल में जेल में बंद थे। इससे पहले विजय मिश्राा उस व्व्त विवादों में आए थे जब वह राष्टï्रपति चुनाव प्रचार के लिए लखनऊ आए वर्तमान राष्टï्रपति के सम्मान में दिए गऐ भेज में नजर आए थे। यह भोज मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दिया था और उस वक्त जेल में निरूद्ध विजय मिश्राा कानून की धज्जियां उड़ाते हुए मुख्तार अंसारी के साथ मुख्यमंत्री आवास पर नजर आए थे। 

कहा जाता है कि घूस लेने वाला जितना बड़ा अपराधी होता है, उससे बड़ा घूस देने वाला। लेकिन अखिलेश यादव की सरकार ने विजय मिश्राा या उनकी बेटी के खिालाफ कोई कार्रवाई करने के बजाय 500 रूपए की नोट लेने वाले 3 पुलिसवालों को सस्पेंड करके अपने कत्र्वयों की इतिश्री कर ली है। 

Reported by Anurag Tiwari for www.voiceofmovement.in 

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